खिलाड़ी बनने की कोई उम्र नहीं होती, प्रकाश और चंद्रो तोमर ने उम्र देखी होती तो कई मेडल उनके खाते नहीं होते। फिल्म Saand Ki Aankh उनकी जिंदगी की कहानी सुनाती है।
जयपुर। बीते कुछ सालों से स्पोट्र्स एक बेहतर कॅरियर के रूप में सामने आया है। अब तो कबड्डी जैसा देशज खेल भी शहरी बच्चों के बीच खूब लोकप्रिय हो रहा है। शहरों के स्कूल में क्रिकेट के बराबर ही लोकप्रिय हो रहा है कबड्डी। फिटनेस के लिए भी किसी न किसी स्पोट्र्स को जॉइन करने का चलन बढ़ा है, चलन तो हर उम्र के लोगों में बढ़ा है, पर न जाने क्या बात है कि खेलों को यूथ से जोडक़र ही देखा जाता है, जबकि कॉलोनी के पार्क में भी आप उम्रदराज लोगों को भी खेलते हुए देख सकते हैं। दरअसल खेल जोश और उससे भी ज्यादा होश से खेले जाते हैं। उम्र तो महज एक नंबर है, जो लोग हर उम्र में फिट रहना चाहते हैं, फिजिकली और मेंटली भी, वे खेल से हमेशा दोस्ती बनाए रखते हैं। उम्र के जिस भी मोड़ पर आप अकेले पड़ जाएं या कुछ भी अच्छा लगना बंद हो जाए, तब भी खेल से दोस्ती की जा सकती है।
‘सांड की आंख’ लेकर आई ऐसी ही एक कहानी
अपकमिंग बॉलीवुड मूवी ‘सांड की आंख’ लंबे समय से सुर्खियां बटोर रही हैं। जिन दो उम्रदराज महिलाओं, चंद्रो तोमर और प्रकाश तोमर, पर यह फिल्म बनी है, उन्होंने तब शॉप शूटिंग शुरू की, जब लोग पूजा-पाठ में समय बिताना ज्यादा पसंद करते हैं या फिर घर में अपने पोते-पोतियों को सुनाते हैं कोई ऐसी कहानी, जो सच नहीं होती। पर इन दादियों ने सोचा कि ग्रेंड चाइल्ड को किस्से-कहानी सुनाने से बेहतर है कि खुद ही कहानी बन जाएं! आइडिया बुरा तो नहीं!
Bhumi Pednekar और Taapsee Pannu बनी हैं शूटर्स दादियां
भूमि पेडनेकर और तापसी पन्नू का शूटर्स दादियां बनना किसी चैलेंज से कम नहीं था, लेकिन दोनों ने इस चैलेंज को स्वीकार किया। दोनों ने शूटिंग को खूब एंजॉय भी किया। 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर भूमि ने बताया, ‘शार्प शूटिंग एक बेहद ही मजेदार खेल है और चंद्रो तोमर के किरदार को निभाकर मुझे इस खेल के बारे में काफी कुछ सीखने को मिला। मेरठ के गांव में रहने वाले कई लोगों के साथ मैंने बातचीत की और जाना कि शार्प शूटिंग को लेकर लोगों में किस हद तक जुनून है।’ तुषार हीरानंदानी द्वारा निर्देशित यह फिल्म इसी साल अक्टूबर में रिलीज होने जा रही है।