
New Trend in Jaipur: राजधानी जयपुर में कुछ दंपती पंडितों से शुभ मुहूर्त निकलवाकर सिजेरियन डिलीवरी करा रहे हैं, ताकि बच्चे की अच्छी कुंडली बन सके। शहर के निजी अस्पतालों में प्रतिदिन 15 में से 6 केस इस तरह के आ रहे हैं। शहरी लोगों में यह ट्रेंड ज्यादा देखने को मिल रहा है। हालांकि इस तरह की डिलीवरी मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। आमतौर पर डॉक्टर विशेष परिस्थितियों में ही सिजेरियन डिलीवरी का विकल्प चुनते हैं, लेकिन लोगों में शुभ मुहूर्त में सिजेरियन डिलीवरी कराने की चाह इतनी बढ़ गई है कि डॉक्टरों को दंपती और उनके परिवार की काउंसलिंग करनी पड़ रही है। वहीं, विशेषज्ञ इस तरह की डिलीवरी को प्रकृति के नियम विरुद्ध बता रहे हैं।
सामान्य प्रसव महिला और बच्चे के लिए बेहतर
सामान्य प्रसव महिला और बच्चे के लिए बेहतर होता है। इससे लंग कम्प्रेशन अच्छा होता है, बच्चे को ऑक्सीजन भरपूर मिलती है। जबकि सिजेरियन डिलीवरी में लंग कम्प्रेशन नहीं हो पाता है।
पिछले कुछ वर्षों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी की मांग बढ़ी है। आजकल दंपती सिजेरियन को प्राथमिकता देते हैं। सामान्य प्रसव के लिए हम मरीज और उनके घरवालों की काउंसलिंग करते हैं।
डॉ. शालिनी राठौड, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, महिला चिकित्सालय
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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में भी मुहूर्त के अनुसार सिजेरियन डिलीवरी करवाने के लिए 3 से 4 चार केस आ रहे हैं। लेकिन हम सामान्य प्रसव की ही सलाह देते हैं। डिलीवरी संबंधी जटिलताएं होने पर ही सर्जरी की जाती है।
डॉ. पूनम चौधरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान
शुभ मुहूर्त देखकर समय से पहले या बाद में प्रसव करवाना सही नहीं है। यह प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है। जो जन्म प्राकृतिक रूप से होता है, उसी में ग्रहों का सही प्रभाव दिखता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश भारद्वाज