
जयपुर। Nikay Chunav Rajasthan 2019 : राजस्थान में निकायों के चुनाव से पहले कराए गए परिसीमन से राजनीतिक दलों का संगठनात्मक ढांचा गड़बड़ा गया है। वार्डों की संख्या बढ़ने से पहले नए वार्ड अध्यक्षों की नियुक्ति करनी होगी। वहीं पुराने वार्ड अध्यक्षों के लिए वार्ड संख्या तय करनी पड़ेगा। जयपुर, जोधपुर और कोटा सहित अन्य बड़े शहरों में वार्डों की संख्या बढऩे और पुराने वार्डों के कार्य क्षेत्र बदले जाने से कई अध्यक्षों का वार्ड दो से तीन वार्डों में बदल गया है। ऐसे में पुराने अध्यक्ष किस वार्ड को संभालेंगे, यह ही तय नहीं हो पा रहा।
सचिन पायलट और अविनाश पांडे से शिकायत
यह मामला वार्डों की आरक्षण लॉटरी ( Rajasthan Municipal Election ) निकाले जाने के साथ ही आला कमान तक पहुंच गया है। राजनीतिक दलों को निकाय क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूती देने के लिए पहले वार्डों के अध्यक्ष नियुक्त करने होंगे। सूत्रों के मुताबिक हाल ही प्रदेश कांग्रेस और भाजपा मुख्यालय में बड़े नेताओं के पास वार्ड अध्यक्षों के कार्य क्षेत्र को लेकर उलझन के बारे बताया। कांग्रेस में तो प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और प्रभारी सचिव विवेक बंसल को भी कई पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत की है।
चुनाव लड़ने वालों को रखें वार्ड अध्यक्ष से दूर
कांग्रेस और भाजपा में ज्यादातर वार्ड अध्यक्ष निकाय चुनाव में किस्मत आजमा चाहते हैं। ऐसे में वे अभी से टिकट के जुगाड़ में जुट गए। ऐसे में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की ओर से मांग की जा रही है कि संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए नए वार्ड अध्यक्ष वे ही बनाए जाएं, जो चुनाव नहीं लड़ना चाहते। इसका नतीजा यह होगा कि वार्ड अध्यक्ष चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के लिए जमीनी स्तर पर ज्यादा अच्छा काम कर सकेंगे।