एसएमएस अस्पताल में रोज एक-दो लोग पहुंचते हैं घायल होकर, चाइनीज ही नहीं, धातु मिश्रीत मांझा पर भी है रोक
जयपुर। चाइनीज मांझा ही नहीं, सभी तरह के धातु मिश्रीत मांझा जिंदगी के लिए खतरा है। इसको देखते हुए जुलाई 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने देश भर में मांझे पर बैन लगा दिया था। इसके बावजूद जानलेवा मांझा शहर की सड़कों पर खुलेआम बिकते देखा जा सकता है।
यहां तक की हर वर्ष चाइनजी और धातु मिश्रीत मांझे से बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं। इनमें कुछ की मौत भी हो जाती है। इसी का नतीजा है गुरुवार को श्याम नगर क्षेत्र में मांझे ने एक युवक की जान ले ली। लेकिन पुलिस और प्रशासन, बेखौफ एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। एसएमएस अस्पताल में अभी से रोज एक या दो लोग मांझे की चपेट में आने से घायल होने पर एसएमएस अस्पताल पहुंच रहे हैं। सड़क पर दौडऩे वाले दुपहिया सवार लोग मांझे की चपेट में अधिक आ रहे हैं।
इन पर रोक, फिर भी बाजार में उपलब्ध
एनजीटी ने चाइनीज मांझे, नायलॉन धागे, कांच लगा धागा (मांझा) खरीदने-बेचने और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। साथ में कांच-मेटल पाउडर के कोट (लेप) वाले मांझे पर भी पाबंदी लगाई है।
बेजुबान पक्षियों की भी जा रही जान
आसमान में उडऩे वाले बेजुबान पक्षियों की जान भी मांझे की डोर में उलझकर जा रही है। गौरतलब है कि लोगों के साथ पशु-पक्षी प्रेमी लगातार मांझे पर रोक लगाने की मांग करते आ रहे थे। मांझे की खतरे को देखते हुए एनजीटी ने धातुमिश्रीत मांझे पर भी रोक लगा दी थी।
हादसे दर हादसे
04 जनवरी : डीसीएम के पास बाइक पर जाते फागी हाल डीसीएम-टैगोरनगर निवासी महावीर की चायनीज मांझे से गर्दन कट गई। लोग उसे तत्काल अस्पताल ले गए लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई।
02 जनवरी : भीलवाड़ा में बहन के साथ बाइक पर बाजार जा रहे बोरड़ा निवासी युवक प्रतापसिंह की चायनीज मांझे से गर्दन कट गई। शुक्र रहा कि लोग उसे तुरन्त अस्पताल ले गए और ऑपरेशन कराया, जिससे उसकी जान बच गई।
22 दिसंबर : जयपुर में गोपालपुरा मोड़ से रिद्धि-सिद्धि की ओर जाने वाले ओवरब्रिज पर स्कूटी सवार 50 वर्षीय व्यक्ति की गर्दन में मांझा आ फंसा। वह गंभीर घायल हो गया था।