पिछले वर्ष की तुलना में जयपुर का औसत एक्यूआइ का स्तर 125 से बढक़र 144 पहुंचा, केंद्र ने रोके 98 करोड़, शहर में बिगड़ती जा रही हवा की सेहत को सुधारने के लिए उठाने होंगे ठोस कदम
जयपुर शहर की आबोहवा दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। बढ़ते प्रदूषण स्तर के चलते इस बार केंद्र सरकार भी जयपुर मदद नहीं करेगी। इस वर्ष जयपुर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 144 दर्ज किया गया है, जबकि पिछली बार यह 125 था। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) के तहत मिलने वाले 98 करोड़ रुपए इस वर्ष नहीं दिए जाएंगे। जबकि पिछले चार वित्तीय वर्षों में जयपुर को 300 करोड़ रुपए से अधिक का बजट मिला था।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) का बजट रुकने के बाद शहरी सरकार सहित अन्य महकमे सक्रिय हुए। जिसके चलते दिल्ली से आए एनकैप के निदेशक प्रशांत भार्गव ने कलक्ट्रेट सभागार में बैठक ली। बैठक में उन्होंने हरियाली को बढ़ावा देने से लेकर आबादी क्षेत्रों से लेकर बाजारों में धूल कम से कम उड़े, इस पर ध्यान देने के लिए कहा। इसके अलावा बैठक में मौजूद सदस्यों से सुझाव भी दिए। सुझावों में दिल्ली की तर्ज पर यहां भी ऑड और ईवन को लेकर भी चर्चा हुई। कई अधिकारी इस प्रस्ताव के पक्ष में दिखे।
बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि छह स्थानों पर प्रदूषण नापने के बड़े सेंटर संचालित हो रहे हैं। बैठक इनकी संख्या बढ़ाकर दस करने पर चर्चा की गई।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य वायु प्रदूषण कम करना है।
-एनकैप से मिलने वाले पैसे का सही उपयोग करने पर चेन्नई सहित अन्य शहरों ने प्रदूषण का स्तर कम कर लिया। ऐसे में इन शहरों के पैसा केंद्र सरकार देती रहेगी।
-चेन्नई के अलावा रायपुर, बेंगलुरू, नागपुर, हैदराबाद से लेकर इंदौर, कोलकाता, कोटा, अमृतसर और मुम्बई जैसे शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार हुआ है।