पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जयपुर-कूकस मार्ग पर एक बेहद अनूठा और निराला अंदाज नजर आया, जब उन्होंने सड़क पर अपनी फोटो वाले 'अन्नपूर्णा किट' बैग को एक बाइक सवार के पास देखा।
राजस्थान की राजनीति में 'जादूगर' के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्सर अपने सरल स्वभाव के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन सोमवार को कूकस से जयपुर लौटते वक्त उन्होंने जो किया, उसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अमूमन वीवीआईपी सुरक्षा घेरे में रहने वाले गहलोत ने जब चलती कार से एक साधारण बाइक सवार को देखा, तो वे खुद को रोक नहीं पाए और एक 'कॉन्टेंट क्रियेटर' की तरह मोबाइल निकालकर उसका वीडियो बनाने लगे।
दरअसल, उस बाइक सवार युवक की बाइक पर कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई 'अन्नपूर्णा राशन किट योजना' का कैरीबैग बंधा हुआ था। इस बैग पर अशोक गहलोत की मुस्कुराती हुई तस्वीर छपी थी। सत्ता से बाहर होने के महीनों बाद भी अपनी योजना के किट बैग को जनता द्वारा उपयोग में लाते देख गहलोत के चेहरे पर संतोष और खुशी के भाव साफ नजर आए।
दिलचस्प बात यह रही कि वह बाइक सवार अपनी ही धुन में गाड़ी चला रहा था। उसे इस बात का रत्ती भर भी अहसास नहीं था कि जिस नेताजी की तस्वीर उसके बैग पर है, वही साक्षात पीछे आ रही गाड़ी से उसका वीडियो बना रहे हैं। गहलोत ने उस पल को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया, मानो वे यह देख रहे हों कि उनकी मेहनत का फल आज भी जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
वीडियो वायरल होते ही नेटिजन्स इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। प्रशंसकों का कहना है कि यह गहलोत साहब की सादगी है कि वे आज भी जनता के बीच अपनी योजनाओं की स्वीकार्यता देखकर एक बच्चे की तरह खुश होते हैं।
जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वीडियो के जरिए गहलोत ने बिना कुछ कहे यह संदेश दे दिया है कि भाजपा सरकार भले ही योजनाओं के नाम बदल दे, लेकिन उनकी योजनाओं का प्रभाव आज भी राजस्थान की रगों में दौड़ रहा है।
अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल के दौरान जनहित की कई योजनाएं शुरू की थीं, जिनमें अन्नपूर्णा किट और चिरंजीवी योजना प्रमुख थीं। सड़क पर चलते हुए आज भी उन किट बैग्स और कार्ड्स का नजर आना यह साबित करता है कि वे चीजें केवल सरकारी आंकड़े नहीं, बल्कि लोगों की जरूरत बन चुकी हैं। गहलोत का यह वीडियो उन कार्यकर्ताओं के लिए भी 'बूस्टर' का काम कर रहा है जो आगामी चुनावों की तैयारी में जुटे हैं।