
IAS Aditi Varshney - PIC Credit : Bureaucrats Media
भारतीय प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी अदिति वार्ष्णेय ( Aditi Varshney ) अब आधिकारिक रूप से राजस्थान कैडर का हिस्सा बन चुकी हैं। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की मंजूरी मिलने के बाद उनके गुजरात कैडर से राजस्थान कैडर में अंतर-कैडर स्थानांतरण (Inter-Cadre Transfer) का आधिकारिक आदेश राज्य के कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। इस प्रशासनिक आदेश के जारी होते ही गुजरात और राजस्थान दोनों राज्यों के कार्मिक विभागों ने कार्यमुक्ति और नए पदभार की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इस तबादले का मुख्य शीर्षक कार्मिक विभाग द्वारा "Inter cadre transfer of Ms. Aditi Varshney, IAS (GJ:2023) to Rajasthan cadre on grounds of marriage to Sh. Madhav Bharadwaj, IAS" रखा गया है। इस आदेश के लागू होने से राजस्थान ब्यूरोक्रेसी को एक नई प्रशासनिक ऊर्जा और युवा दूरदर्शिता प्राप्त होगी, जो राज्य के विकास कार्यों में एक नया दृष्टिकोण जोड़ेगी।
आईएएस अदिति वार्ष्णेय के गुजरात से मरुधरा के इस प्रशासनिक सफर के पीछे उनका पारिवारिक और वैवाहिक कारण सबसे प्रमुख रहा है। अदिति वार्ष्णेय का विवाह राजस्थान कैडर के ही आईएएस माधव भारद्वाज ( IAS Madhav Bharadwaj ) के साथ संपन्न हुआ है। माधव भारद्वाज राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का बड़ी ही कुशलता के साथ निर्वहन कर रहे हैं और उन्हें राज्य के सबसे होनहार युवा अधिकारियों में गिना जाता है।
विवाह के पवित्र बंधन में बंधने के बाद दोनों ही अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए दो अलग-अलग राज्यों (गुजरात और राजस्थान) में सुदूर रहकर अपनी ड्यूटी पूरी करना और एक स्वस्थ पारिवारिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती साबित हो रहा था।
इसी प्रशासनिक और मानवीय दृष्टिकोण को गंभीरता से ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के डीओपीटी विभाग ने सेवा नियमों के विशेष प्रावधानों के तहत अदिति वार्ष्णेय को उनके पति के कार्यक्षेत्र राजस्थान कैडर में समायोजित करने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त कर दिया। इस मानवीय निर्णय से न केवल दोनों युवा अधिकारियों को एक मजबूत पारिवारिक संबल मिलेगा, बल्कि वे अधिक मानसिक एकाग्रता के साथ जनता की सेवा कर सकेंगे।
राजस्थान कैडर में शामिल होने जा रही आईएएस अदिति वार्ष्णेय की कार्यशैली, उनका शैक्षणिक सफर और उनकी प्रशासनिक सोच काफी प्रेरणादायक है। आइए जानते हैं उनके जीवन और करियर से जुड़ी 10 सबसे महत्वपूर्ण बातें:
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) जैसी कठिन परीक्षा को पास करने में लोगों को कई साल और कई प्रयास लग जाते हैं। लेकिन अदिति ने साल 2022 में अपने पहले ही प्रयास में इसे क्रैक कर सबको हैरान कर दिया।
अदिति ने न सिर्फ इस परीक्षा को पास किया, बल्कि बेहद शानदार रैंक भी हासिल की। उन्होंने पूरे देश में 57वीं ऑल इंडिया रैंक प्राप्त की, जिससे उन्हें आसानी से प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर मिल गया।
अदिति देश के सबसे युवा प्रशासनिक अधिकारियों में से एक हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मी और पली-बढ़ी अदिति ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर महज 23 साल की उम्र में ही अपने आईएएस बनने के सपने को सच कर दिखाया।
जहाँ देश भर से लाखों छात्र कोचिंग के लिए दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे बड़े हब का रुख करते हैं, वहीं अदिति ने सामान्य अध्ययन (General Studies) के लिए पूरी तरह सेल्फ-स्टडी (खुद पढ़ाई) का रास्ता चुना। उन्होंने पूरी तैयारी स्टैंडर्ड बुक्स, एनसीईआरटी (NCERT) और रोज़ाना अखबार पढ़कर की।
अदिति को सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा अपने घर से ही मिली। उनकी मां इंदु वार्ष्णेय, जो कि एक गृहिणी (होममेकर) हैं, उनका युवावस्था में आईएएस अधिकारी बनने का एक बड़ा सपना था। अदिति ने अपनी इस सफलता से अपनी मां के उस अधूरे सपने को हकीकत में बदल दिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के मशहूर मिरांडा हाउस से बी.ए. ऑनर्स (B.A. Honours) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' (DSE) में पोस्ट ग्रेजुएशन (Masters) में दाखिला लिया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि कॉलेज की पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा है, तो उन्होंने एक साहसिक फैसला लेते हुए मास्टर्स की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।
अदिति ने यूपीएससी मेन्स परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय (Optional Subject) के रूप में सोशियोलॉजी को चुना था। उन्होंने टेस्ट सीरीज़ के जरिए अपनी आंसर राइटिंग को सुधारा और इस विषय में 289 अंक हासिल किए, जिसने उन्हें टॉप-100 रैंक में लाने में बड़ी भूमिका निभाई।
जब यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ, तो अदिति काफी घबराई हुई थीं। जब उन्होंने व्हाट्सऐप पर आई मेरिट लिस्ट में अपना नाम 57वें स्थान पर देखा, तो उन्हें अपनी आँखों पर भरोसा नहीं हुआ। उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि यह कोई सपना तो नहीं है, यह पक्का करने के लिए उन्होंने आधिकारिक पीडीएफ को कई बार डाउनलोड करके चेक किया था।
फरवरी 2026 में अदिति अपने व्यक्तिगत और प्रेरक विचारों के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं। उन्होंने अपने ही बैच के साथी आईएएस अधिकारी माधव भारद्वाज (AIR 536, राजस्थान कैडर) से शादी की। किसी भी तरह की "तड़क-भड़क और शाही शादी" को छोड़कर, दोनों ने अलवर के मिनी सचिवालय में बेहद सादगी के साथ केवल कुछ पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में कोर्ट मैरिज की।
अदिति को प्रशासनिक सेवा के लिए गुजरात कैडर मिला है। वर्ष 2026 की शुरुआत से वे जामनगर शहर में प्रांत अधिकारी (एसडीएम / Sub-Divisional Magistrate) के पद पर तैनात रहीं, जहाँ वे अपनी शांत, अनुशासित और कुशल कार्यशैली के लिए जानी जा रही हैं।
आम पाठकों और सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह जानना बेहद दिलचस्प है कि आखिर आईएएस अधिकारियों का कैडर ट्रांसफर किस तरह होता है। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद जब किसी उम्मीदवार को एक बार कोई राज्य कैडर (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र या बिहार) आवंटित कर दिया जाता है, तो सामान्य परिस्थितियों में पूरे सेवाकाल के दौरान उसे उसी राज्य में अपनी सेवाएं देनी होती हैं।
परंतु, भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम 1954 के नियम 5(2) के तहत केंद्र सरकार को यह विशेष शक्ति प्राप्त है कि वह अत्यंत असाधारण और मानवीय परिस्थितियों में किसी अधिकारी के कैडर को दूसरे राज्य में बदल सकती है। इसके केवल दो ही मुख्य आधार होते हैं: पहला— किसी अधिकारी का अखिल भारतीय सेवा के ही किसी अन्य अधिकारी से विवाह होना (जिसका लाभ आईएएस अदिति वार्ष्णेय को मिला है), और दूसरा— अत्यधिक गंभीर और असाधारण व्यक्तिगत या चिकित्सीय आधार (Extreme Compassionate Grounds)। इस प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ संबंधित दोनों राज्यों (रिलीव करने वाले और ज्वाइन कराने वाले राज्य) की लिखित सहमति अनिवार्य होती है।
Published on:
30 May 2026 03:31 pm
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