टैरिफ पीटिशन पर राज्य विद्युत विनियामक आयोग की जनसुनवाई
जयपुर। राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने शुक्रवार को टैरिफ पीटिशन पर दायर जयपुर डिस्कॉम के उपभोक्ताओं की आपत्तियों को सुना। इसमें आपत्तिकर्ताओं ने महंगी बिजली खरीद से लेकर बिजली चोरी व छीजत का बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर डालने का मुद्दा उठाया। राजस्थान टैक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने पुराने पॉवर परचेज एग्रीमेंट को खत्म करने की पुरजोर मांग रखी। उन्होंने आयोग को साफ कहा कि ऐसे महंगे अनुबंधों से डिस्कॉम्स से लेकर जनता की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है। लोगों को महंगी बिजली मिलने के लिए हर ऐसे मामलों पर विचार कर उनका निस्तारण करना होगा। हालांकि, डिस्कॉम ने एनटीपीसी से पांच अनुबंध निरस्त करने की प्रक्रिया के बारे में बताया, लेकिन आपत्तिकर्ताओं ने ऐसे ही कई निजी व सरकारी दोनों स्तर के अनुबंधों पर भी गौर करने की जरूर जताई। जयपुर डिस्कॉम में टैरिफ पीटिशन को लेकर 20 आपत्ति आई थीं। 2 अगस्त को भी सुनवाई होगी।
फिक्स चार्ज बढ़ाने के खिलाफ बोले
अघरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल में फिक्स चार्ज बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ भी बोले। कोटा हॉस्टल एसोसिएशन ने तर्क दिया कि, कोविड के कारण वैसे ही अभी तक हॉस्टल संचालन ठप है। फिक्स चार्ज में राहत देने की बजाय डिस्कॉम्स इसमें बढ़ोत्तरी करने की जरूरत जता रहा है।
अस्पताल की बिजली दर कम करने की भी मांग
निजी अस्पतालों की बिजली दर कम करने के भी मांग की गई। अस्पताल संचालकों ने इसकेे पीछे इसे सेवा कार्य बताते हुए इस पर गौर करने की जरूरत जताई। अभी निजी अस्पताल का कनेक्शन अघरेलू श्रेणी में है। हालांकि, इस मांग और उनके तर्क पर आयोग व डिस्कॉम्स अफसरों ने आश्चर्य भी जताया।
यह भी सुझाव
-राज्य में सरप्लस रहने वाली बिजली को उद्योगों को सस्ती दर पर दे दी जाए।
-विद्युत वितरण निगमों को घाटा कम करने और दक्षता में सुधार लाने के लिए सिस्टम में आमूलचूल परिवर्तन हो।
-टैरिफ स्लैब, स्थाई शुल्क, कोविड़ अवधि के दौरान विद्युत बिल में राहत मिले।
यह है फिक्स चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव
टैरिफ पीटिशन में डिस्कॉम्स ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधा के नाम पर फिक्स चार्ज बढ़ाना प्रस्तावित किया है। अघरेलू उपभोक्ताओं (कॉमर्शियल, संस्थानिक, औद्योगिक) पर फिक्स चार्ज को बोझ बढ़ सकता है। विद्युत दर कम करके फिक्स चार्ज बढ़ाने का फार्मूला सुझाया गया है।