जयपुर

PATRIKA PODCAST : युद्धरत मां स्त्रैणशून्य

कन्या हो अथवा स्त्री पीहर में वह अपरा प्रकृति के रूप में जीती है और पतिगृह में वह परा प्रकृति रूप में।

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Mar 12, 2026

Gulab Kothari Article : युद्धरत मां स्त्रैणशून्य : नारी विकसित देशों में अद्र्धांगिनी नहीं बन पाई। विवाह के बाद भी दोनों एकाकार नहीं हो पाये, पूरक नहीं बने। जीवन आदि सभ्यता जैसा ही पुन: लौट आया। तब समाज व्यवस्था का स्वरूप क्या रह जाएगा? आज विकसित देशों में समाज व्यवस्था लुप्त होती जा रही है। व्यक्ति एकल जीवन जीने को आतुर है। कानून भी व्यक्तिवाद पर आधारित हो गए हैं। ब्रह्म और माया के स्वरूप को कहां ढूंढ़ पाएंगे? माया कार्य करेगी, इसमें तो शंका होनी ही नहीं चाहिए।

Published on:
12 Mar 2026 05:41 pm
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