
सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ
Rajasthan Land Conversion Rules 2026: राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए समय सीमा 45 से घटाकर 30 दिन कर दी है। राजस्व विभाग की बुधवार को जारी अधिसूचना में आवासीय, कॉमर्शियल, औद्योगिक व संस्थानिक उपयोग के मामलों में संभागीय आयुक्त को भी अधिकार दिए गए हैं।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि छोटे मामलों में तहसीलदार व उपखंड अधिकारी, मध्यम मामलों में कलक्टर और बड़े मामलों में संभागीय आयुक्त या राज्य सरकार अनुमति देगी। इनके स्तर पर 15 दिन में फैसला नहीं होने पर मामला स्वतः कलक्टर को भेजा जाएगा।
नियमों में बड़ा बदलाव नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर है। अब सोलर, विंड, बायोमास, बायोगैस, सीएनजी-सीबीजी, हाइड्रो व बैटरी स्टोरेज जैसे सभी प्रोजेक्ट एक ही श्रेणी 'रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स' में शामिल होंगे। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क औद्योगिक दर का मात्र 10 प्रतिशत तय किया गया है। न्यूनतम भूमि सीमा 4 हजार से बढ़ाकर 10 हजार वर्गमीटर कर दी गई है। 7 दिन में रूपांतरण शुल्क जमा करना होगा।
भू-उपयोग परिवर्तन में दी जा रही छूट का दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में केवल एससी-एसटी वर्ग को बिना रास्ते के शपथ-पत्र के आधार पर तहसीलदार स्तर पर कन्वर्जन की अनुमति थी, अब यह सुविधा गैर एससी-एसटी आवेदकों को भी मिलेगी। ऐसे मामलों में कोई कन्वर्जन शुल्क नहीं लिया जाएगा, केवल एक माह के भीतर सूचना देना पर्याप्त होगा। इसमें भी एप्रोच रोड उपलब्ध होने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। यदि 15 दिन में निर्णय नहीं होता है, तो मामला स्वतः कलक्टर को भेजा जाएगा।
नई नीति के तहत होटल और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट्स को उपखंड अधिकारी और तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है। यानी कलेक्टर स्तर पर ही अनुमति मिलेगी। इस सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा मिल चुका है, इसके बाद भी प्रक्रिया को सरल नहीं किया गया है।
Published on:
30 Apr 2026 06:57 am
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