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राजस्थान में Land Conversion आसान: अब 30 दिन की डेडलाइन, सोलर-विंड प्रोजेक्ट्स को राहत

Rajasthan Land Conversion Rules 2026: राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए समय सीमा 45 से घटाकर 30 दिन कर दी है।
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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

•

Updated: 30 Apr 2026, 6:57 AM IST

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

Rajasthan Land Conversion Rules 2026: राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए समय सीमा 45 से घटाकर 30 दिन कर दी है। राजस्व विभाग की बुधवार को जारी अधिसूचना में आवासीय, कॉमर्शियल, औद्योगिक व संस्थानिक उपयोग के मामलों में संभागीय आयुक्त को भी अधिकार दिए गए हैं।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि छोटे मामलों में तहसीलदार व उपखंड अधिकारी, मध्यम मामलों में कलक्टर और बड़े मामलों में संभागीय आयुक्त या राज्य सरकार अनुमति देगी। इनके स्तर पर 15 दिन में फैसला नहीं होने पर मामला स्वतः कलक्टर को भेजा जाएगा।

ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को प्राथमि​कता

नियमों में बड़ा बदलाव नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर है। अब सोलर, विंड, बायोमास, बायोगैस, सीएनजी-सीबीजी, हाइड्रो व बैटरी स्टोरेज जैसे सभी प्रोजेक्ट एक ही श्रेणी 'रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स' में शामिल होंगे। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क औद्योगिक दर का मात्र 10 प्रतिशत तय किया गया है। न्यूनतम भूमि सीमा 4 हजार से बढ़ाकर 10 हजार वर्गमीटर कर दी गई है। 7 दिन में रूपांतरण शुल्क जमा करना होगा।

गैर एससी-एसटी की जमीन पर शुल्क नहीं

भू-उपयोग परिवर्तन में दी जा रही छूट का दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में केवल एससी-एसटी वर्ग को बिना रास्ते के शपथ-पत्र के आधार पर तहसीलदार स्तर पर कन्वर्जन की अनुमति थी, अब यह सुविधा गैर एससी-एसटी आवेदकों को भी मिलेगी। ऐसे मामलों में कोई कन्वर्जन शुल्क नहीं लिया जाएगा, केवल एक माह के भीतर सूचना देना पर्याप्त होगा। इसमें भी एप्रोच रोड उपलब्ध होने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। यदि 15 दिन में निर्णय नहीं होता है, तो मामला स्वतः कलक्टर को भेजा जाएगा।

पर्यटन क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स की मंजूरी कलक्टर को

नई नीति के तहत होटल और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट्स को उपखंड अधिकारी और तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है। यानी कलेक्टर स्तर पर ही अनुमति मिलेगी। इस सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा मिल चुका है, इसके बाद भी प्रक्रिया को सरल नहीं किया गया है।

ये भी बदलाव

  • पेट्रोल पंप के लिए भूमि का चयन करते समय स्कूल, अस्पताल, रिहायशी क्षेत्र व जल स्रोत से कम से कम 50 मीटर दूरी रखना अनिवार्य होगा।
  • सिरोही जिले के कुछ गांवों में कृषि भूमि के कन्वर्जन के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

ये अधिकारी देंगे अनुमति

  • आवासीय यूनिट: 10 हजार वर्ग मी. तक- तहसीलदार।
  • आवासीय कॉलोनी/प्रोजेक्ट: 10 हजार वर्ग मी. तक एसडीओ, 50 हजार तक कलेक्टर, 1 लाख वर्ग मी. तक संभागीय आयुक्त और इससे अधिक क्षेत्र में राज्य सरकार।
  • कॉमर्शियल: करीब 5 हजार वर्ग मी. तक एसडीओ, 50 हजार तक कलेक्टर, 1 लाख वर्ग मी. तक संभागीय आयुक्त और इससे अधिक में राज्य सरकार।
  • औद्योगिक उपयोग: 10 हजार वर्ग मी. तक एसडीओ, 1 लाख तक कलेक्टर, 2 लाख वर्ग मी. तक संभागीय आयुक्त और इससे अधिक मामलों में राज्य सरकार।
  • नमक उत्पादन: 1 लाख वर्ग मी. तक एसडीओ, 2 लाख तक कलेक्टर और इससे अधिक मामलों में संभागीय आयुक्त।पब्लिक यूटिलिटी: 10 हजार वर्ग मी. तक एसडीओ, 50 हजार तक कलेक्टर, 1 लाख तक संभागीय आयुक्त और इससे अधिक में राज्य सरकार निर्णय लेगी।
  • संस्थानिक व मेडिकल उपयोग: 10 हजार वर्ग मी. तक एसडीओ, 50 हजार तक कलेक्टर, 1 लाख तक संभागीय आयुक्त और इससे अधिक मामलों में राज्य सरकार।
  • एसईजेड (सेज): सभी मामलों में राज्य सरकार अनुमति देगी।
  • फूड प्रोसेसिंग यूनिट: 10 हजार वर्ग मी. तक एसडीओ, 50 हजार तक कलेक्टर, 1 लाख तक संभागीय आयुक्त और इससे अधिक मामलों में राज्य सरकार।
  • हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन: सभी मामलों में कलेक्टर अधिकृत।
  • स्टेडियम, खेल मैदान व स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: सभी मामलों में भी कलेक्टर ही अनुमति देंगे।
  • इंटीग्रेटेड टाउनशिप: राज्य सरकार स्तर पर।

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