
Petrol-Diesel: चार माह की शांति के बाद अब एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल के दाम आम आदमियों को रूलाएंगे। चौहतरफा से महंगाई की मार पड़ेगी सो अलग।
भारत के पांच राज्यों में चुनाव और दूसरी तरफ रूस व यूक्रेन के बीच एक हफ्ते से जारी जंग का असर अब देखने को मिलेगा। चुनाव परिणाम आने के साथ ही चार माह की शांति के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर आसमान में नजर आएंगे। खाद्य तेल के दामों में पहले से ही काफी बढ़ेत्तरी हो चुकी है।
चुनावों के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नहीं बढ़ा पाना सरकार की मजबूरी बनी हुई थी। माना जा रहा है कि चुनाव खत्म होने के साथ ही तेल कंपनियां एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल के दामों को बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होंगी और चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा किया जाएगा।
15 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं दाम
जानकार लोगों के अनुसार पेट्रोल-डीजल के दामों में इस बार जो आग लगेगी वह लंबे समय तक नहीं बुझ पाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में इजाफा होने के कारण माना जा रहा है कि तेल कंपनियां करीब 15 रुपए प्रति लीटर तक पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा कर सकती है।
116 डॉलर के पार कच्चा तेल
यूक्रेन पर 24 फरवरी को रूस के हमले के बाद बच्चे तेल की कीमतों में काफी उछाल आया। गुरुवार को ब्रेंट 116 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया। आपूर्ति में व्यवधान होने के कारण गेहूं, सोयाबीन, खाद्य तेल, तांबा, स्टील, टल्यूमीनियम जैसी धातुओं की कीमतों में काफी उछाल आया है। ऐसे में लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
आयात पर निर्भरता
- एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत अपनी तेल की जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करता है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर भारत में भी पड़ने वाला है।
- राज्य सरकारों की ओर से संचालित तेल कंपनियों ने 4 नवंबर 2021 से ईंधन के दामों में बढ़ोतरी नहीं की है।
- देश में खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के 6 प्रतिशत के अनुमान से ऊपर चली गई है।