जयपुर

क्या बच पाएगा गुलाबी नगरी का वर्ल्ड हेरिटेज स्टेटस? आखिर यूनेस्को क्यों दे रहा चेतावनी?

जयपुर वॉल्ड सिटी को भारत के सबसे सुव्यवस्थित शहरों में से एक माना जाता है। इस शहर का निर्माण पारंपरिक वैदिक नगर नियोजन और ग्रिड पैटर्न के आधार पर किया गया था।

2 min read
Mar 06, 2026
नाहरगढ़ किले से पिंक सिटी का नजारा (फाइल फोटो-पत्रिका)

जयपुर। गुलाबी नगरी में स्थित ऐतिहासिक जयपुर वॉल्ड सिटी (परकोटा) इन दिनों चर्चा में है। वर्ष 2019 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर (World Heritage Site) का दर्जा दिया गया था, लेकिन अब इसके संरक्षण और प्रबंधन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो जयपुर से यह प्रतिष्ठित दर्जा वापस भी लिया जा सकता है।

जयपुर की वॉल्ड सिटी की स्थापना वर्ष 1727 में सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी। यह भारत के सबसे सुव्यवस्थित नियोजित शहरों में से एक माना जाता है। शहर का निर्माण पारंपरिक वैदिक नगर नियोजन और ग्रिड पैटर्न के आधार पर किया गया था।

ये भी पढ़ें

राजस्थान: किसान के बेटे ने आईएएस बनकर रचा इतिहास, UPSC में पाई 33वीं रैंक, जानें सफलता की कहानी

क्यों मिला था विश्व धरोहर का दर्जा?

गुलाबी रंग की इमारतें, चौड़ी सड़कों का नियोजन, बाजारों की संरचना और सांस्कृतिक विरासत ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई। इसी विशेषता के कारण 2019 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया, जिससे जयपुर की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पर्यटन संभावनाओं में भी वृद्धि हुई।

यूनेस्को की बढ़ती चिंता

हाल के वर्षों में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने वॉल्ड सिटी के संरक्षण को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ऐतिहासिक शहर की दीवारों के आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। कई स्थानों पर हेरिटेज नियमों का उल्लंघन भी सामने आया है।

हाईकोर्ट के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन

इसके अलावा संरक्षण से जुड़े नियमों के पालन में भी ढिलाई देखी गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण को सील करने और विरासत को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों को रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन आदेशों के क्रियान्वयन में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दी। यूनेस्को अधिकारियों ने यह भी चिंता जताई है कि कई विकास परियोजनाएं बिना उचित हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट के आगे बढ़ाई जा रही हैं।

सरकार से मांगी गई रिपोर्ट

विश्व धरोहर समिति ने राजस्थान सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए विस्तृत कार्ययोजना मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार को 1 दिसंबर 2026 तक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें सुधारात्मक कदमों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। साथ ही ‘स्पेशल एरिया हेरिटेज डेवलपमेंट प्लान’ तैयार कर उसे लागू करने पर भी जोर दिया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह दर्जा?

विश्व धरोहर का दर्जा केवल सम्मान नहीं, बल्कि यह इस बात की मान्यता भी है कि यह स्थल पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है और इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है। यदि जयपुर से यह दर्जा वापस लिया जाता है तो इससे शहर की प्रतिष्ठा के साथ-साथ पर्यटन उद्योग पर भी असर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्ष जयपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन किया गया और अवैध निर्माण पर नियंत्रण किया गया तो शहर अपनी विश्व धरोहर पहचान बरकरार रख सकता है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan: हाईवे किनारे के दुकानदारों को सता रहा पीले पंजे का डर, जानें क्या है 150 मीटर का नया नियम?

Updated on:
06 Mar 2026 08:56 pm
Published on:
06 Mar 2026 08:55 pm
Also Read
View All

अगली खबर