जयपुर

PATRIKA PODCAST : मेरी अन्तर्यात्रा

मैं अपने शरीर को आधार बनाकर ही जीवन के कार्यकलाप सम्पन्न करता हूं।

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Mar 07, 2026

Gulab Kothari Article : मेरी अन्तर्यात्रा : पुरुष शरीर में आत्मा व्याप्त रहता है। इसी में उसके पूर्वजों के अंश व्याप्त रहते हैं। मुझे पुंभ्रूण के रूप में शुक्राणु के शुक्र में प्रतीक्षा करनी पड़ी। अणुरूप बीज था। मुझे नहीं मालूम आगे का यात्रा पथ। बस, प्रतीक्षा। सोचता हूं कि कितने प्राणी होंगे जो इतनी बार अग्नि कुण्ड से गुजरते होंगे! कितना कठिन है मानव शरीर धारण करना।

Updated on:
08 Mar 2026 01:10 pm
Published on:
07 Mar 2026 03:30 pm
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