जयपुर

सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई पुलिस की फिटनेस

2014 से अब तक गई पांच की जान
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Jun 16, 2018
jaipur news
सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई पुलिस की फिटनेस

जयपुर. पुलिसकर्मियों पर काम का भारी दबाव रहता है। ड्यूटी के बीच कई बार वह खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। उनकी पीटी परेड और फिटनेस भी अक्सर कागजों तक सिमटकर रह जाती है। ऐसे में वे न केवल शारीरिक क्षमता में तो पिछड़ते जाते हैं बल्कि तनाव बढ़ता जाता है। दौड़ के बीच एक पुलिसकर्मी की मौत के बाद राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो यही स्थिति सामने आई। कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया, तनाव इतना है कि खुद के लिए समय नहीं दे पाते। शुक्रवार को भी सुबह से ड्यूटी पर रहे। रात को कितने बजेंगे, कह नहीं सकते। फिर शनिवार को कानून-व्यवस्था संभालने वापस सुबह से ही ड्यूटी पर आना है। खुद के लिए समय कहां मिल पाता है पीटी परेड और फिटनेस कागजों में ही होती है। फिटनेस के लिए थानों आदि में कोई कार्यक्रम नहीं होते।

विभाग की देर भी पड़ रही भारी

पुलिस विभाग में पदोन्नति परीक्षा में देर भी पुलिसकर्मियों की जान पर भारी पड़ रही है। दौडऩे की परीक्षा जिस उम्र में होनी चाहिए, उससे ३ से ६ साल बाद हो रही है। ऐसे में परीक्षा के मुताबिक फिटनेस नहीं रहती। थानों में तैनात पुलिसकर्मियों की मानें तो सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर को एक्सरसाइज का समय ही नहीं मिलता।

नियम या खुद बदले

एक राय : कुछ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कांस्टेबल-अधिकारी तक काम का दबाव है। पुलिसकर्मियों को खुद के लिए समय निकालना चाहिए। दौड़, व्यायाम आदि का अभ्यास बनाए रखना चाहिए।

दूसरी राय : शुक्रवार को मौत के शिकार हुए सुशील के परिजनों ने कहा, अपनों को खोने का गम अपने ही समझ सकते हैं। अधिकारियों को चाहिए कि उम्रदराज कर्मियों के लिए प्रमोशन के नियम बदलें।

नहीं आई पिता को नींद

सुशील की बड़ी बेटी कीर्ति का इसी वर्ष नीट की परीक्षा में चयन हुआ है। छोटा बेटा मंयक कक्षा 11वीं में पढ़ता है। सुशील के पिता केशव देव भर्राए गले से बोले की गुरुवार शाम ही सुशील से बात हुई थी। रात को करीब ढ़ाई बजे अचानक नींद खुली। मन अजीब सा हो रहा था। बैचेनी के कारण दोबारा नींद नहीं आई। अलसुबह ही नहा-धोकर जयपुर जाने के लिए तैयार हुआ। सिकंदरा पहुंचा था, तभी छोटे बेटे का फोन आया कि सुशील की दौड़ में दम भरने से तबियत खराब हो गई है।

1 साल पहले मेडिकल जांच, सब फिट

पुलिस अधिकारियों की मानें तो जयपुर कमिश्नरेट में तैनात पुलिसकर्मियों की एक साल पहले निजी अस्पताल से मेडिकल जांच कराई थी। तब कई पुलिसकर्मियों को व्यायाम और खान-पान बदलने की सलाह दी थी। कई पुलिसकर्मियों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ बताया था। बावजूद पुलिसकर्मियों की फिटनेस पर कोई काम नहीं हुआ। एक साल पहले कराई गई जांच से ही पुलिसकर्मियों को फिट मान लिया।

पदोन्नति की दौड़ में 2014 से अब तक गई 5 जाने

- 3 फरवरी 2014 : अमृतपुरी, घाटगेट निवासी कांस्टेबल रामजीलाल भेरवाल
- दिसंबर 2015 : दायरा, सीकर निवासी एएसआइ मालीराम
- जून 2015 : बहरोड, अलवर निवासी एएसआइ नवलकिशोर
- 29 जून 2017 : आरपीए में भीलवाड़ा निवासी एसआइ हेमंत सिंह कोली
- 15 जून 2017 : जयपुर में हैड कांस्टेबल सुशीलकुमार शर्मा

Published on:
16 Jun 2018 11:30 am