जयपुर

Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान में 31 जुलाई से पहले पंचायत चुनाव की तैयारी, गांवों में फिर राजनीतिक हलचल

Rajasthan Panchayat Election 2026: जयपुर ग्रामीण में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद अब 31 जुलाई 2026 से पहले चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक और गतिविधियां बढ़ गई है।
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Updated: 24 May 2026, 12:59 PM IST
Rajasthan Panchayat Elections Medical staff angry after Jaipur District Collector order February salary bill stalled RMCTA angry
Rajasthan Panchayat Election (फोटो - AI)

जयपुर/ बस्सी। जयपुर ग्रामीण में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद अब 31 जुलाई 2026 से पहले चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक और गतिविधियां बढ़ गई है। राजनीतिक अदालत ने साफ कहा है कि राज्य सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर चुनाव नहीं टाल सकती। इसके बाद जयपुर जिले की 22 पंचायत समितियों और 596 ग्राम पंचायतों में संभावित प्रत्याशी सक्रिय हो गए है।

हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को शहरी निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून तक पूरा करने के निर्देश दिए है। तय समय सीमा में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। पहले अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन राजस्थान सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला देते हुए असमर्थता जताई थी। अब कोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रशासनिक मशीनरी तेजी से सक्रिय हो गई है।

जगा चुनावी माहौल

कोर्ट के आदेश के बाद ग्रामीण राजनीति में फिर हलचल बढ़ गई है। पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य बनने की तैयारी कर रहे लोग गांव-ढाणियों में बैठकों और जनसंपर्क में जुट गए हैं। लंबे समय से चुनाव टलने के कारण स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां धीम पड़ गई थीं, लेकिन अब सामाजिक कार्यक्रमों और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए माहौल फिर गर्माने लगा है।

हजारों पदों पर होगा चुनाव

जयपुर जिले में जिला परिषद के 7 वार्ड हैं। इसके अलावा 22 चायत समितियों में 386 चायत समिति सदस्य वार्ड आते तथा इनके अंतर्गत 596 ग्राम चायतें हैं। इन पंचायतों में जारों वार्ड पंचों के पदों पर भी चुनाव होना है। इतने बड़े स्तर पर चुनाव होने से पूरे जिले में व्यापक राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार स्थानीय मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।

स्थानीय मुद्दों पर रहेगा फोकस

भावी प्रत्याशियों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। गांवों में सड़क, पानी, बिजली, रोजगार और विकास कार्य जैसे मुद्दे चर्चा में आने लगे है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार चुनाव में युवाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है, जिससे मुकाबला और रोचक होने की संभावना है

निकाय चुनावों को लेकर भी बढ़ी उम्मीद

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी निकायों में भी चुनाव को लेकर उत्साह बढ़ा है। बस्सी नगरपालिका का गठन हुए करीब पांच साल हो चुके हैं. लेकिन अब तक यहां चुनाव नहीं हुए हैं। इसी तरह जमवारामगढ़ और कानोता में भी निकाय चुनाव लंबित हैं। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद इन क्षेत्रों में भी चुनाव की उम्मीद मजबूत हुई है।

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