जयपुर

प्रोपर्टी… गुरु पूर्णिमा: गुरु चरण पूजा और सन्मार्ग प्रशस्ति का पर्व

Jul 28, 2026
Rajasthan

हिण्डौैनसिटी. आषाढ़ मास की पूर्णिमा भारतीय परम्परा में गुरु और आचार्यों को समर्पित है। शास्त्रों में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है,क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों और पुराणों का संकलन किया। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। श्रीराम मंदिर के पंडित नित्यकिशोर शास्त्री ने बताया है इस बार गुरुपूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को है। इस दिन शिष्य गुरुआश्रमों में पहुंच श्रीगुरुदेव की चरणों की पूजा करते हैं।

परिवार में सुख-शांति
गुरु सदैव शिष्यों को सन्मार्ग की प्रेरणा देते हैं। गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा करने व आशीर्वाद से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है। परम्परा है कि गुरु के मार्गदर्शन से पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

धर्मलाभ:
धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन दान-पुण्य, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। गुरु की सेवा और सम्मान से धर्म-कर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है। श्रद्धालु को ईश्वर कृपा और आध्यात्मिक उन्नति का लाभ मिलता है।

पूजा विधान:
प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गुरु या आचार्य के चित्र अथवा चरणों का पूजन करें। पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें और गुरु मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार करें और दिनभर भक्ति में लीन रहें।

पौराणिक महत्ता:
पौराणिक मान्यता है कि इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। वेदव्यास ने वेदों, महाभारत और पुराणों का संकलन कर मानवता को ज्ञान का अमूल्य भंडार दिया। इस दिन गुरु पूजा व व्रत से पापों का क्षय होता है और जीवन में धर्म, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

हिण्डौनसिटी. पंडित नित्यकिशोर शास्त्री।

Updated on:
28 Jul 2026 06:00 am
Published on:
28 Jul 2026 06:00 am