जयपुर

राजस्थान: 3 साल बाद ट्रांसफर हो सकेगा कच्ची बस्ती का पट्टा, निकाय चुनाव से पहले सरकार के फैसले पर उठे सवाल

सरकारी जमीन पर बनी कच्ची बस्तियों के अहस्तांतरणीय पट्टों को तीन साल बाद बेचने और ट्रांसफर करने की छूट पर सवाल उठ रहे हैं। स्वायत्त शासन विभाग द्वारा नगरीय निकाय चुनाव से ठीक पहले जारी इस आदेश को वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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Aug 23, 2026
rule for patta transfer
सरकारी जमीन बेचने की छूट पर उठा विवाद, जानिए क्या है नया नियम? (पत्रिका फाइल फोटो)

जयपुर: सरकारी जमीन पर बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के तहत पात्र लोगों को दिए गए अहस्तांतरणीय पट्टों को अब तीन साल बाद हस्तांतरित करने की व्यवस्था ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिस सरकारी जमीन पर कब्जे को नियमन कर पट्टा दिया गया, वही जमीन कुछ साल बाद खरीद-फरोख्त योग्य संपत्ति कैसे बन गई? नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग की ओर से हाल ही में जारी आदेश में कच्ची बस्तियों में जारी अहस्तांतरणीय पट्टों के नाम हस्तांतरण और नामांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट की है। नगरीय निकाय चुनाव घोषणा से एक दिन पहले के इस आदेश को 'वोट बैंक' से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूर्व में 10 साल बाद ऐसे पट्टों को हस्तांतरणीय बनाने का प्रावधान था। 29 जून 2022 के प्रावधान के तहत जारी अहस्तांतरणीय पट्टों के लिए यह अवधि तीन साल रखी गई। अवधि पूरी होने के बाद पट्टों के नाम हस्तांतरण व नामांतरण का रास्ता खुल गया है।

कच्ची बस्ती को सिर्फ अतिक्रमण नहीं माना

सरकार वोट बैंक के चलते लंबे समय से कच्ची बस्तियों के नियमन की नीति लागू कर रही है। इसके तहत तय कटऑफ तिथि तक बस्ती में रह रहे पात्र परिवारों को नियमों के अनुसार पट्टा दिया जाता है। यानी, हर सरकारी जमीन पर हुआ कब्जा अपने आप पट्टे का हकदार नहीं है। पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित बस्ती और भूखंड नियमन के दायरे में आते हैं या नहीं।

निकायों के सामने होगी असली परीक्षा

अब स्थानीय निकायों को यह देखना होगा कि मूल पट्टा किस आदेश के तहत जारी हुआ था। संबंधित बस्ती नियमन के दायरे में थी या नहीं। कटऑफ तिथि की शर्त पूरी करता था या नहीं और जिस भूखंड का पट्टा दिया गया, वह किसी प्रतिबंधित उपयोग वाली जमीन पर तो नहीं है। इन सवालों की सही जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि तीन साल बाद पट्टे का हस्तांतरण नियमों के अनुरूप है या नहीं।

हाईकोर्ट भी उठा चुका है सवाल

सरकारी जमीन पर बसी, कॉलोनी-बस्तियों के नियमन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में भी सवाल उठ चुके हैं। कोर्ट ने कहा है कि पार्क, खेल मैदान, सड़क, रास्ते, खुली सार्वजनिक जमीन, आरक्षित जमीन, वन भूमि, नदी, नाला, तालाब और अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में बसी बस्तियों को पट्टा नहीं दिया जा सकता। ऐसे में तीन साल बाद पट्टा हस्तांतरित करने की अनुमति से ज्यादा अहम सवाल यह है कि मूल पट्टा जारी करते समय इन शर्तों की पालना हुई थी या नहीं।

Updated on:
23 Aug 2026 07:32 am
Published on:
23 Aug 2026 07:32 am