जम्मू-कश्मीर में जब एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू से कश्मीर को हर मौसम में जोड़ने वाली काजीगुंड और बनिहाल के बीच बनी सुरंग का उदघाटन कर रहे हैं तो देश में बनी तमाम सड़क सुरंगों का जिक्र छिड़ गया है। ऐसे में राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी के नाम से मशहूर जयपुर का जिक्र होना लाजमी है। झलाना की पहाड़ियों में बनी घाट की गुणी सुरंग प्रदेश की सबसे लंबी सुरंग है।

जम्मू-कश्मीर में जब एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू से कश्मीर को हर मौसम में जोड़ने वाली काजीगुंड और बनिहाल के बीच बनी सुरंग का उदघाटन कर रहे हैं तो देश में बनी तमाम सड़क सुरंगों का जिक्र छिड़ गया है। ऐसे में राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी के नाम से मशहूर जयपुर का जिक्र होना लाजमी है। झलाना की पहाड़ियों में बनी घाट की गुणी सुरंग प्रदेश की सबसे लंबी सुरंग है। सुरंग निर्माण के बाद आमजनको काफी राहत मिली है और आगरा से सीधा जुड़ाव हो गया है। इससे दिल्ली, जयपुर और आगरा के स्वर्णिम त्रिकोण पर्यटन को भी काफी फायदा हुआ है।
मनमोहन सिंह-सोनिया गांधी ने किया था लोकार्पण
घाट की गूणी सुरंग परियोजना का लोकार्पण तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं उस समय यूपीए अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने किया था। जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 150 करोड़ रुपये की लागत से इस योजना का बीओटी आधार पर निर्माण करवाया गया था। लोकार्पण के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुरंग का अवलोकन भी किया था। इस सुरंग का टोल टैक्स भी जल्द ही समाप्त होने जा रहा है।
इसलिए है ख़ास सुरंग
अरावली पर्वत की सुरम्य वादियों में स्थित इस परियोजना की कुल लम्बाई 2800 मीटर है जिसके तहत 870 मीटर लम्बाई की दो सुरंगे जहां शहर के बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए बनाई गईं वहीं इसने गुलाबी नगर के पर्यटन की भी शोभा बढ़ाई। दोनों सुरंग 330 मीटर की दूरी पर आपस में जुड़ी हुई है। इस सुरंग परियोजना के शुरू होने से जयपुर से आगरा के लिए वैकल्पिक एवं सुरक्षित आवागमन सुविधा मिली है।
राजस्थान की पहली हाइटेक सुरंग
सुरंग में अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं जिनमें वेंटीलेशन के लिए पंखे, टेलीफोन बूथ, अत्याधुनिक अग्निशमन यंत्र, पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ के साथ ही रोशनी की समुचित व्यवस्था की गई है। सुरंग में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए सेंसर व्यवस्था भी उपलब्ध है। ब्रेक डाउन अथवा दुर्घटना से निपटने के लिए सुरंगों में दो इन्टरकनेक्टिंग मार्ग बनाये गये हैं।