जयपुर

Rajasthan Budget 2026 : बजट सत्र से पहले चढ़ा सियासी पारा, गहलोत और जूली को वासुदेव देवनानी ने दिया खरा जवाब

Rajasthan Budget 2026 : राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो रहा है। बजट सत्र से पहले प्रश्न लगाने, मंत्रियों के जवाब और सदन की कार्यवाही से जुड़े नियमों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रविवार को प्रेस वार्ता की। जानिए क्या कहा?

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राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी। फोटो पत्रिका

Rajasthan Budget 2026 : राजस्थान विधानसभा के 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले प्रश्न लगाने, मंत्रियों के जवाब और सदन की कार्यवाही से जुड़े नियमों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रविवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा सचिवालय की ओर से अब जारी किए गए बुलेटिन में वही प्रावधान हैं, जो वर्ष 2020 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के कार्यकाल में जारी किए गए थे। देवनानी ने कहा कि इन नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी वे सदन के भीतर ही देंगे।

वासुदेव देवनानी ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधानसभा से जारी होते आ रहे बुलेटिन को यदि वे पढ़ते, तो शायद इस तरह के बयान नहीं आते। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही है कि ये नियम पहली बार लागू हुए हैं, जबकि ऐसा नहीं है। वर्ष 2020 में जारी बुलेटिन संख्या-20 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा बुलेटिन में कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा गया है।

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विस्तारित प्रश्न न हों और पांच साल से अधिक पुरानी जानकारी संभवतः नहीं मांगी जाए ये सभी नियम पहले से ही लागू हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 2020 के बाद अब 2026 में ही इन नियमों पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है, जबकि जूली उस समय की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे।

90 से 95 फीसदी सवालों के जवाब समय पर मिल रहे

वासुदेव देवनानी ने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने के लिए उनके कार्यकाल में लगातार मॉनिटरिंग की गई है, जिसका नतीजा यह है कि अब 90 से 95 फ़ीसदी सवालों के जवाब समय पर मिल रहे हैं जो पहले नहीं होता था। पिछली विधानसभा में पर्ची व्यवस्था बंद कर दी गई थी। जिसे उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद फिर शुरू किया। उनका मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है न किसी पर पाबंदी लगाना है

‘तुच्छ’ शब्द पर भी सफाई

विपक्ष की ओर से ‘तुच्छ’ शब्द पर जताई गई आपत्ति पर देवनानी ने कहा कि यह शब्द लोकसभा की व्यवस्था से लिया गया है। पिछले चार सत्रों में न तो इस पर कोई आपत्ति आई और न ही कोई चर्चा हुई। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पहले बुलेटिन पढ़े ही नहीं गए या अब राजनीतिक आधार पर बयान दिए जा रहे हैं।

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