Rajasthan Civic Elections : राजस्थान में निकाय चुनाव पर नया अपडेट। राजस्थान में यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है तो नगरीय निकाय चुनाव का क्या होगा। जानें।
Rajasthan Civic Elections : राजस्थान में यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है तो नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए करीब 2150 वार्ड आरक्षित किए जा सकते हैं। शहरी आबादी में ओबीसी की करीब 21 प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर यह आरक्षण तय होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की रिपोर्ट में भी लगभग इसी अनुपात के आंकड़े सामने आ सकते हैं। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में चुनाव होने हैं।
अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 1795 और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 399 वार्ड पहले ही आरक्षित किए जा चुके हैं। एससी के 552 और एसटी के 161 अतिरिक्त वार्ड बढ़े हैं। अब सबसे ज्यादा नजर ओबीसी आरक्षण के फार्मूले पर टिकी है।
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि सरकार की कोशिश तय समय पर चुनाव कराने की है। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट समय पर नहीं आने पर भी चुनाव कराए जाएंगे और सभी वर्गों को नियमानुसार प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। दूसरी ओर राजस्थान हाईकोर्ट, राज्य सरकार को 31 जुलाई से पहले नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों की तैयारियों पर नजर बनी हुई है।
चुनाव वर्ष - निकाय - कुल वार्ड - एससी - एसटी - ओबीसी
वर्ष 2019- 196 - 7,500 - 1,243 - 238 - 1,502
वर्ष 2026- 09- 10,245 - 1,795 - 399
चुनाव - एससी - एसटी - ओबीसी
2019- 30 - 06 - 39
2026- 49 - 11 -.....
प्रदेश के सात संभागों में कुल 309 नगरीय निकाय और 10245 वार्ड प्रस्तावित हैं। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद, 19 द्वितीय श्रेणी, 58 तृतीय श्रेणी और 175 चतुर्थ श्रेणी नगरपालिकाएं शामिल हैं। जयपुर संभाग में सबसे अधिक 91 निकाय और 2970 वार्ड हैं, जबकि कोटा और उदयपुर संभाग में 28-28 निकाय हैं।
हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समयसीमा 31 जुलाई तक बढ़ा दी है। साथ ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के लिए 20 जून तक की समयसीमा तय की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस समय सीमा तक रिपोर्ट नहीं आने पर राज्य निर्वाचन आयोग अपनी प्रक्रिया शुरू कर दे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने शुक्रवार को राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने 14 नवम्बर 2025 को पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व गिरिराज सिंह देवंदा की जनहित याचिका को निस्तारित करते समय 15 अप्रेल 2026 तक चुनाव कराने की समय सीमा तय की गई थी। राज्य सरकार ने प्रार्थना पत्र में कहा था कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने के कारण इस समयसीमा के भीतर चुनाव कराया जाना संभव नहीं है। इसके अलावा चुनाव टालने के लिए राज्य सरकार ने दिसंबर तक का मासिक कैलेंडर भी बताया। कोर्ट ने इस प्रार्थना पत्र पर 11 मई को सुनवाई पूरी कर ली थी।