जयपुर

राजस्थान भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट की 2 से 15 लाख में होती थी डील, गवाह पलटे तो डमी परीक्षार्थी कोर्ट से बरी

Dummy Candidate Case: बाड़मेर के एक परीक्षा केंद्र पर कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ी गई एक डमी परीक्षार्थी अदालत से बरी हो गई। गवाहों के पलटने और लचर अनुसंधान के कारण अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

3 min read
May 19, 2026
डमी अभ्यर्थी बरी,कोर्ट केस में गवाह पलटे, फोटो एआइ

Dummy Candidate Case: बाड़मेर के एक परीक्षा केंद्र पर कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ी गई एक डमी परीक्षार्थी अदालत से बरी हो गई। गवाहों के पलटने और लचर अनुसंधान के कारण अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। अदालत में सरकारी पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों के बयानों में ऐसा विरोधाभास दिखा कि कोर्ट को आरोपी को दोषमुक्त करना पड़ा।

बड़ा सवाल यह है कि यदि सिस्टम के अंग ही जिम्मेदारी से पीछे हटेंगे, तो बेरोजगारों को न्याय कैसे मिलेगा। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट की 2 से 15 लाख में डील के खुलासे तो हुए लेकिन पुलिस की लचर जांच से आरोपी कोर्ट से दोषमुक्त हो रहे हैं।

ये भी पढ़ें

NEET Paper Leak: 8 मई की रात से 15 मई की गिरफ्तारी तक…राजस्थान SOG इस सीक्रेट रणनीति से पहुंची सरगना तक

विरोधाभासी बयानों ने आरोपी को दिलाया 'संदेह का लाभ'

  • बीएसटीसी परीक्षा-2014 में बाड़मेर के एक परीक्षा केंद्र (कमरा नंबर 17) से डमी अभ्यर्थी पकड़ी गई थी। चार मई 2014 को बाड़मेर सदर थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई थी। करीब दस वर्ष बाद 18 अप्रेल 2024 को कोर्ट का फैसला आया। यह मामला कोर्ट में इन बयानों के कारण कमजोर हुआ-
  • केन्द्राधीक्षक: तत्कालीन केन्द्राधीक्षक/प्रधानाचार्य ने बाड़मेर में एफआइआर तो दर्ज कराई, लेकिन कोर्ट में कहा कि उन्हें यह जानकारी केवल वीक्षक से मिली थी। हद तो तब हो गई जब वे कोर्ट में प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) की फोटो देखकर भी यह नहीं पहचान सके कि वह मूल अभ्यर्थी की है या नहीं।
  • पुरुष वीक्षक: पुलिस को दिए बयानों में वीक्षक ने डमी परीक्षार्थी को पकड़ने की पूरी कहानी लिखवाई थी। मगर कोर्ट में अपनी बात से पूरी तरह मुकरते हुए कहा कि उसके सामने किसी को नहीं पकड़ा गया और उसे मामले की कोई जानकारी ही नहीं है।
  • महिला वीक्षक: पुलिस के सामने महिला वीक्षक ने कुबूल किया था कि शक होने पर आरोपी ने खुद को डमी परीक्षार्थी बताया था। लेकिन कोर्ट में वे पलट गईं और कहा कि किसके स्थान पर कौन परीक्षा दे रहा था, उन्हें नहीं पता।
  • जांच अधिकारी का दावा: पुलिस अनुसंधान अधिकारी (आइओ) ने कोर्ट में बयान दिया कि आरोपी डमी परीक्षार्थी उन्हें परीक्षा केंद्र पर नहीं, बल्कि सीधे थाने में मिली थी। इस बयान ने रंगे हाथ मौके पर गिरफ्तारी के दावे की हवा निकाल दी।

2 से 15 लाख रुपए का खेल, पिछले साल आए 115 मामले

भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बैठाने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। एसओजी की ओर से जून 2024 में गिरफ्तार पेपर लीक माफिया हनुमान मीणा ने खुलासा किया था कि उसने शिक्षक भर्ती-2022 और एलडीसी-2018 जैसी कई परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बैठाने के बदले 2 से 15 लाख रुपए तक लिए थे। प्रदेश में पिछले वर्ष 115 से अधिक और इस वर्ष अब तक 60 से अधिक ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी एसओजी एफएसएल जांच करवा रही है।

यूं समझे कैसे पलटा मामला

  • परीक्षा केन्द्राधीक्षक: वीक्षक से सुनी बात पर डमी परीक्षार्थी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दी
  • वीक्षक ने कहा, डमी परीक्षार्थी को नहीं पकड़ा और जानकारी भी नहीं है
  • जांच अधिकारी बोले- आरोपी केंद्र पर नहीं, सीधे थाने में मिली; कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ

एक्सपर्ट कमेंट्स: कैसे रुकेगा यह ट्रेंड?

केस ऑफिसर्स स्कीम और साइंटिफिक साक्ष्य जरूरी

मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती। गवाह कई बार दबाव या लालच में बदल जाते हैं। ऐसे में 'केस ऑफिसर्स स्कीम' लागू कर सख्त निगरानी रखनी चाहिए। कोर्ट में केस मजबूत करने के लिए मौके के दस्तावेजी साक्ष्य, सीडीआर, बायोमैट्रिक, सीसीटीवी फुटेज और हस्ताक्षर परीक्षण की एफएसएल रिपोर्ट अनिवार्य की जानी चाहिए।
बी.एस. चौहान, विशेष लोक अभियोजक, एसओजी

बार-बार न बदलें सरकारी वकील

गवाहों के पक्षद्रोही (होस्टाइल) होने पर भी एक सजग लोक अभियोजक मजबूत दस्तावेजी साक्ष्यों के दम पर सजा करवा सकता है। बार-बार सरकारी वकील (लोक अभियोजक) बदलने से केस पर बुरा असर पड़ता है। संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में विशेष लोक अभियोजक की स्थायी नियुक्ति ही फलदायी होती है।

  • वी.के. सिंह, एडीजी (कानून व्यवस्था), राजस्थान

ये भी पढ़ें

SI भर्ती रद्द होने से डबल झटका… 59 चयनितों का वर्दी का सपना टूटा, तो बाकी नौकरियां भी हाथ से फिसल गईं
Also Read
View All