जयपुर

Kanhaiya Lal Murder Case : फिर ‘तिलमिलाए’ अशोक गहलोत, अब निर्मला सीतारमण पर साधा निशाना, जानें क्या कहा?

गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से वित्त मंत्री के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया कि राजस्थान की तत्कालीन सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी।
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Feb 08, 2026
Rajasthan Ex CM Ashok Gehlot slams Nirmala Sitaraman on Kanhaiya Lal Murder Case

जयपुर। राजस्थान की राजनीति और देश की संसद में 'कन्हैयालाल हत्याकांड' एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में इस मुद्दे को उठाने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोर्चा खोल दिया है। गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से वित्त मंत्री के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया कि राजस्थान की तत्कालीन सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी।

'तथ्यात्मक रूप से गलत है वित्त मंत्री का बयान'

अशोक गहलोत ने अपने बयान में सबसे पहले वित्त मंत्री के दावों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यह कहना कि कोई एक्शन नहीं लिया गया, पूरी तरह भ्रामक है।

गहलोत ने लिखा "यह तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत एवं भ्रामक है। राजस्थान पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए कुछ ही घंटों में हत्यारों को अरेस्ट किया था। फिर पुलिस से केस लेकर केंद्र सरकार ने जांच एनआईए को दे दी। तब से 2022 से आज दिन तक 2026 तक श्री कन्हैयालाल जी का परिवार न्याय का इंतजार कर रहा है।

हत्यारों को सजा कब मिलेगी ?

गहलोत ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब मामला एनआईए के पास है, तो दोषियों को अब तक सजा क्यों नहीं मिली? उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह जब भी राजस्थान आते हैं, वे इस मुद्दे पर चुप्पी साध लेते हैं और मामले को 'गोल' कर जाते हैं।

गहलोत ने लिखा, 'आपके नेता और गृह मंत्री श्री अमित शाह से मैं बार- बार पूछता हूँ कि क्या हुआ हत्यारों को सजा कब मिलेगी तो वो जवाब नहीं देते हैं।'

हत्यारों के 'भाजपा कनेक्शन' पर फिर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बार फिर वह गंभीर आरोप दोहराया जो उन्होंने विधानसभा चुनावों के दौरान भी लगाया था। उन्होंने दावा किया कि कन्हैयालाल के हत्यारे भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे।

गहलोत ने लिखा, 'कन्हैयालाल जी के हत्यारे भाजपा के कार्यकर्ता थे। इनको अभी तक सजा नहीं मिलने के कारण जनता के मन में आशंका पुष्ट होती जा रही है कि भाजपा कार्यकर्ता होने के कारण इन दोनों को इतने ओपन एंड शट केस होने के बावजूद इन्हें सजा नहीं दी जा रही है।'

'फास्ट ट्रैक' में क्यों नहीं चलाया जा रहा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हत्यारों को सजा न मिलने के कारण जनता के मन में यह आशंका गहरी हो रही है कि वे भाजपा से जुड़े थे, इसीलिए उनके खिलाफ कार्यवाही धीमी है। उन्होंने पूछा कि इतने स्पष्ट सबूतों और वीडियो रिकॉर्डिंग के बावजूद यह केस 'फास्ट ट्रैक' में क्यों नहीं चलाया जा रहा?

'मुआवजे पर 5 लाख बनाम 50 लाख का झूठ'

अशोक गहलोत ने भाजपा द्वारा चुनावों के दौरान फैलाए गए 'मुआवजे के झूठ' पर भी पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि
कन्हैयालाल के परिवार को कांग्रेस सरकार ने 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। उनके दोनों पुत्रों को सरकारी नौकरी प्रदान की गई थी। भाजपा ने चुनावों में फायदा लेने के लिए '5 लाख रुपये' देने का सफेद झूठ फैलाया ताकि जनता को गुमराह किया जा सके।

गहलोत ने लिखा, 'चुनावों के समय भाजपा ने 5 लाख वर्सेज 50 लाख का झूठ बोलकर इस मुद्दे का इस्तेमाल किया लेकिन सच यह है कि श्री कन्हैयालाल के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा दिया गया एवं उनके दोनों पुत्रों को सरकारी नौकरी दी गई। चुनाव के बाद अब गृह मंत्री जब भी राजस्थान आते हैं तो इस मुद्दे पर चुप रहते हैं, मामले को गोल कर जाते हैं। देश की जनता यह सब देख रही है और समय आने पर आपकी जवाबदेही तय की करेगी।'

संसद में क्या कहा था निर्मला सीतारमण ने ?

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के 'लिंचिंग' वाले आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने उदयपुर की घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि जब विपक्ष लिंचिंग की बात करता है, तो उन्हें वह दिन याद करना चाहिए जब राजस्थान में एक टेलर की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उन्होंने तत्कालीन गहलोत सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे, जिसका जवाब अब गहलोत ने तथ्यों के साथ दिया है।

क्या था कन्हैयालाल हत्याकांड केस

राजस्थान के उदयपुर में एक दर्जी कन्हैया लाल की जून 2022 में दो व्यक्तियों ने हत्या कर दी, जिन्होंने इस कृत्य को फिल्माया था। यह हत्या कथित तौर पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में एक सोशल मीडिया पोस्ट के प्रतिशोध में की गई थी। बाद में इस मामले को एनआईए ने अपने कब्जे में ले लिया और यह सांप्रदायिक सद्भाव और आंतरिक सुरक्षा के संबंध में राजनीतिक बहस का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

Updated on:
08 Feb 2026 04:56 pm
Published on:
08 Feb 2026 04:45 pm