
जयपुर. राजस्थान में नए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ-हॉफ) की नियुक्ति के लिए मंगलवार को प्रस्तावित चयन समिति की बैठक से ठीक पहले इस पद के प्रमुख दावेदार पीके उपाध्याय के खिलाफ एसीबी में परिवाद दर्ज होने का मामला सामने आया है। अलवर के राजगढ़ वन क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी विभागीय जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी और मूल जांच अधिकारी को हटाने के आरोपों को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराई गई है।
एसीबी ने 20 सितंबर को उपाध्याय के खिलाफ शिकायत दर्ज की। शिकायतकर्ता एवं पर्यावरणविद् तपेश्वर सिंह भाटी ने राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को कानूनी प्रतिवेदन भेजकर मांग की है कि प्रकरण से जुड़े तथ्यों की समीक्षा किए बिना उपाध्याय के नाम पर विचार नहीं किया जाए और उन्हें अंतरिम प्रभार भी न सौंपा जाए। मौजूदा पीसीसीएफ हॉफ अरिजीत बनर्जी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले है, ऐसे में मंगलवार की प्रस्तावित बैठक अहम है। इस बैठक में पीके उपाध्याय, शिखा मेहरा और अनुराग भारद्वाज के नामों पर विचार होना है।
खुलासे के बाद, पहले से विवादों में रहे उपाध्याय की पीसीसीएफ-हॉफ पद की दावेदारी और कमजोर हो गई है। इससे पहले भी पीसीसीएफ-हॉफ चयन समिति की 24 सितंबर की प्रस्तावित बैठक 'अपरिहार्य कारणों' से स्थगित कर दी गई थी। उस समय भी बैठक से पहले 20 सितंबर को तपेश्वर सिंह भाटी ने मुख्य सचिव को एक कानूनी पत्र भेजा था, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज होने की जानकारी देते हुए कहा गया था कि जांच पूरी होने तक उपाध्याय के नाम पर विचार न किया जाए।
उपाध्याय के खिलाफ शिकायत का संबंध अलवर जिले की राजगढ़ रेंज में वन समितियों के माध्यम से कराए गए कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से है। इसमें 17 से 21 करोड़ रुपए के गबन का आरोप है। तत्कालीन विभागीय जांच अधिकारी राजीव चतुर्वेदी ने 7 फरवरी 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह प्रकरण एसीबी को भेजने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश पर करीब 17 महीने तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उस दौरान उपाध्याय पीसीसीएफ (प्रशासन) और वन बल प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।