केंद्र सरकार की यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लेकर प्रदेश के कर्मचारी संगठनों में हलचल बढ़ गई है।
राजस्थान में केंद्र सरकार की यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लेकर प्रदेश के कर्मचारी संगठनों में हलचल बढ़ गई है। हालांकि प्रदेश में पहले से ही ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू है। यूपीएस को लेकर राज्य के कर्मचारी संगठन आकलन कर रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ने रविवार को प्रदेश के कई कर्मचारी संगठनों से यूपीएस और ओपीएस को लेकर बात की। कर्मचारी संगठनों ने यूपीएस को एनपीएस से तो बेहतर बताया, लेकिन कर्मचारी हितों के लिए ओपीएस को सर्वश्रेष्ठ बता रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ओपीएस में 20 वर्ष की सेवा पूरी होने पर कर्मचारी 50 प्रतिशत पूर्ण पेंशन पाने का हकदार है, जबकि यूपीएस में 25 साल पूर्ण होने पर 50 प्रतिशत पेंशन मिलेगी। ओपीएस में कर्मचारियों को कोई अंशदान नहीं देना पड़ता, जबकि यूपीएस में कर्मचारियों को 10 प्रतिशत योगदान देना पड़ेगा।
ओपीएस का कोई मुकाबला नहीं है, उसमें कर्मचारियों की कोई कटौती नहीं होती है। जीपीएस और स्टेट इंश्योरेंस का पैसा सेवानिवृत्ति के दिन ब्याज सहित मिल जाता है। कर्मचारी हितों के लिहाज से तो ओपीएस सर्वश्रेष्ठ है। - गजेंद्र सिंह राठौड़, अध्यक्ष राज्य कर्मचारी महासंघ एकीकृत
कर्मचारियों का भला तो ओपीएस में ही है। राजस्थान में अगर ओपीएस से छेड़छाड़ की गई तो विरोध करेंगे। - कुलदीप यादव, प्रदेशाध्यक्ष जलदाय कर्मचारी संघ
यूपीएस में कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और पेंशन में नुकसान होगा, जबकि ओपीएस में फायदा ही मिलता है। केंद्रीय कर्मचारी को ही इसके बारे में सोचना है। - राजसिंह चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ
एनपीएस का नाम बदलकर यूपीएस कर दिया, इससे अच्छा होता कि ओपीएस ही लागू कर देते, अगर राजस्थान में यूपीएस लाने का प्रयास किया गया तो विरोध करेंगे। - नरपत सिंह, अध्यक्ष सचिवालय सहायक कर्मचारी संघ