
Delay in Sonography Test : राज्य सरकार का पूरा फोकस बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने पर है, लेकिन इस महकमे में फैली अव्यवस्था की वजह से मरीजों को सुविधा कम, परेशानी ज्यादा हो रही है। प्रदेश के ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सोनोग्राफी करवाने के लिए लम्बी कतार में लगना पड़ रहा है। जांच रिपोर्ट के लिए भी लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। उदयपुर में सोनोग्राफी के लिए मरीजों को एक सप्ताह बाद आने को कहा जा रहा है। भीलवाड़ा में 15 से 20 दिन बाद की डेट मिल रही है। अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में तो मरीजों को सोनोग्राफी जांच के लिए दो महीने का इंतजार करवाया जा रहा है। मजबूरन मरीजों को निजी लैब से सोनोग्राफी करवानी पड़ रही है। जब तक पर्ची नहीं कटती, तब तक मरीज को पता नहीं चलता कि उसे सोनोग्राफी की कौन सी तारीख दी जा रही है।
सोनोग्राफी जांच करवाने के लिए जयपुर के जयपुरिया अस्पताल में सात से दस दिन की वेटिंग मिल रही है। हालांकि इमरजेंसी हालत में आने वाले मरीज व गर्भवती महिलाओं की उसी दिन जांच हो रही है। सवाई मानसिंह अस्पताल में ओपीडी में आने वाले मरीजों को एक से दो दिन की वेटिंग मिल रही है, लेकिन डॉपलर अल्ट्रासाउंड के लिए सात से दस दिन की वेटिंग मिल रही है। गणगौरी अस्पताल, कांवटिया समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में भी ऐसे ही हालात देखे जा रहे हैं।
झुंझुनूं के राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल में सिर्फ एक सोनोग्राफी मशीन है। रोजाना 40 मरीजों की सोनोग्राफी हो पाती है। अन्य को आगे की तारीख दे दी जाती है। यहां एक अन्य सोनोग्राफी मशीन स्टोर में ताले में बंद पड़ी है।
जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में इंडोर पेशेंट की इमरजेंसी के हिसाब से उसी दिन और बाकी की 24 घंटे में सोनोग्राफी हो रही है। आउटडोर मरीजों में सोनोग्राफी के लिए 20 से 25 दिन की वेटिंग चल रही है
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में 70 से 100 मरीजों को 15 से 20 दिन इंतजार करना पड़ रहा है। गंभीर व भर्ती मरीजों की उसी दिन सोनोग्राफी की जा रही है। प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों की सोनोग्राफी की जाती है। 70 से 100 मरीजों को 15 से 20 दिन का इंतजार करना पड़ता है। सोनोग्राफी की रिपोर्ट 10 मिनट में दी जा रही है।
भीलवाड़ा के एमजीएच में चार सोनोग्राफी मशीन है, लेकिन दो ही डॉक्टर होने से दो मशीन पर ही सोनोग्राफी की जाती है। एक डॉक्टर को एपीओ करते हुए उसे मांडल चिकित्सालय में लगाया गया है। इससे मरीजों की संख्या और बढ़ रही है।
उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी की डेट 5 से 7 दिन बाद की मिल रही है। गर्भवती महिलाओं और अन्य रोगियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था कर रखी है। गर्भवती महिलाओं को 6 से 7 दिन बाद की डेट दी जा रही है। अन्य मरीजों में भर्ती रोगियों की सोनोग्राफी एक दिन के अंतराल में हो रही है, जबकि आउटडोर पेशेंट की सोनोग्राफी 4 दिन बाद हो पा रही है। गम्भीर रोगी, वरिष्ठजन की सोनोग्राफी उसी दिन हो रही है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन अस्पतालों में प्रतिदिन 600 से 700 सोनोग्राफी होती है। सोनोग्राफी रिपोर्ट सेम डे या अगले दिन उपलब्ध हो रही है।
कोटा मेडिकल कॉलेज के नवीन चिकित्सालय में सोनोग्राफी जांच के लिए मरीजों का दस दिन में नम्बर आ रहा है। इमरजेंसी में तो सोनोग्राफी हो रही है, लेकिन रूटीन सोनोग्राफी में समय लग रहा है। नवीन चिकित्सालय में रोजाना 110 से 120 सोनोग्राफी होती है। करीब 50 प्रसूताओं की अलग से सोनोग्राफी होती है। कई ऐसे मरीज हैं, जिनका घंटों तक नम्बर नहीं आता है। बूंदी जिले के कापरेन निवासी नारायण बाई ने बताया कि मेँ सोनोग्राफी करवाने के लिए नए अस्पताल में आई थी, लेकिन दो घंटे से इंतजार कर रही हूं, नम्बर नहीं आया। इसी तरह कोटा के छावनी निवासी निजामुद्दीन ने बताया कि मस्से की बीमारी होने पर वह एक घंटे से सोनोग्राफी के लिए इंतजार कर रहा है, लेकिन उसका नम्बर नहीं आया।