
जयपुर।
राजधानी में पेयजल सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड के गठन संबंधी अध्यादेश को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। अब जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी होगा। ऐसे में अब शहरी क्षेत्र में पेयजल व सीवरेज से जुड़ा काम बोर्ड के अधीन आ जाएगा। बोर्ड को प्रभावी बनाने का काम जल्द शुरू होगा, जिसमें फिलहाल जलदाय विभाग के अधिकार भी डेपुटेशन पर काम करेंगे। वहीं, सीवरेज से जुड़े कार्य में जेडीए व नगर निगम का दखल नहीं रहेगा। बोर्ड का मुख्य काम पूरे शहर में पानी और सीवरेज सप्लाई को सुचारू करना होगा। आरयूआइडीपी के माध्यम से बोर्ड के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे राज्यपाल के पास भेजा गया। यह बोर्ड, दिल्ली जल बोर्ड व कर्नाटक की तर्ज पर काम करेगा।
शक्तियों के साथ स्वायत्त होगा
आवासीय व व्यावसायिक पेयजल सप्लाई का निर्धारण, पीने के पानी के गलत उपयोग पर जुर्माना सहित कई शक्तियां बोर्ड के पास होंगी। बोर्ड शहर के किसी भी हिस्से या पूरे शहर में किसी भी स्तर पर पानी सप्लाई बंद रखने का निर्णय ले सकेगा। अभी कलक्टर स्तर पर अनुमति लेनी होती है। फिलहाल जयपुर में इसकी सफलता का आकलन किया जाएगा। संभव है इसकी उपयोगिता के बाद दूसरे शहरों में भी इसी तरह के बोर्ड का गठन कर दिया जाएं।
रहेगा राजनीतिक दखल
सीवरेज और वाटर सप्लाई नियामक बोर्ड का अध्यक्ष पद पूरी तरह से राजनीतिक रहेगा। इसके अलावा सदस्यों के पद पर भी राजनीति से जुड़े लोगों का दखल हो सकता है। ऐसा ही हुआ तो पानी—सीवरेज का तंत्र अफसरों की बजाय राजनीतिक लोगों के हाथों ज्यादा नजर आएगा। सूत्रों के मुताबिक इस सिस्टम में स्थानीय निकाय और महापौर का दखल भी रहेगा।
राज्यपाल ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। जयपुर शहर में पेयजल सप्लाई व सीवरेज के लिए यह टर्निंग प्वाइंट है। सीवरेज व पेयजल सप्लाई जैसी महत्वपूर्ण सेवा एक छत के नीचे होगी। पेयजल सप्लाई में छीजत कम करना, 24 घंटे पेयजल सप्लाई व सीवरेज को बेहतर करने पर बोर्ड का फोकस रहेगा।
—डॉ. प्रीतम यशवंत, प्रोजेक्ट निदेशक, आरयूआइडीपी