राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत-निकाय चुनाव टालने की राज्य सरकार की मांग पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जा सकता और समय पर चुनाव कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है।
जोधपुर/जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव टालने के लिए राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र पर सोमवार को सुनवाई पूरी कर ली, फैसला बाद में सुनाया जाएगा।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 15 अप्रैल तक चुनाव नहीं करवाने पर नाराजगी जताई। वहीं, मौखिक टिप्पणी की कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जा सकता, संवैधानिक प्रावधानों की भावना को बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चुनाव क्यों नहीं करवाए जाएं, क्या ओबीसी सामान्य सीट पर चुनाव नहीं लड़ सकते?
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने चुनाव समय में करवाने का आश्वासन सुप्रीम कोर्ट में भी दिया था। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में अभी कम से कम करीब डेढ़ महीना लगेगा।
रिपोर्ट आने के बाद वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकालने और उसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को कम से कम डेढ़ महीने का समय और लगेगा। ऐसे में चुनाव करवाने की समय-सीमा बढ़ाई जाए।
मूल याचिकाकर्ता पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से अधिवक्ता पुनीत सिंघवी और गिरिराज सिंह देवंदा की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने चुनाव टालने का विरोध करते हुए कहा कि लंबे समय तक चुनाव नहीं करवाना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
सुरेश महाजन बनाम मध्यप्रदेश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव करवाने के निर्देश दिए गए थे। इसी दौरान महाधिवक्ता ने कहा कि बाद में आयोग की रिपोर्ट आने पर राहत भी दी गई थी।
दोनों मूल याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार ने 19 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में भी 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव करवाने का आश्वासन दिया था। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी खंडपीठ के समक्ष पक्ष रखा गया।
उधर, अवमानना याचिका पर सुनवाई 18 को चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक नहीं कराने को लेकर संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा की ओर अवमानना याचिका दायर की गई है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होनी है।