हाईकोर्ट ने भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर व अजमेर जिलों की 93 बजरी लीज की नीलामी रद्द कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित लीजधारकों की जमा राशि लौटाने का निर्देश दिया, वहीं पांच साल में बजरी खनन से संबंधित रहे लीज क्षेत्रों की पुनर्भरण रिपोर्ट 4 माह में तैयार करने को कहा।
जयपुर। हाईकोर्ट ने भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर व अजमेर जिलों की 93 बजरी लीज की नीलामी रद्द कर दी। कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित लीजधारकों की जमा राशि लौटाने का निर्देश दिया, वहीं पांच साल में बजरी खनन से संबंधित रहे लीज क्षेत्रों की पुनर्भरण रिपोर्ट 4 माह में तैयार करने को कहा। साथ ही, कहा कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर मंजूरी ली जाए, उसके बाद ही लीज के लिए नीलामी हो।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने डॉ. बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान की जनहित याचिका पर मंगलवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि बजरी लीज पांच हिस्सों में बांटकर पुनर्भरण के लिए मुक्त रखे जाने वाले क्षेत्रों का नीलामी विज्ञप्ति में विवरण दिया जाए। हाईकोर्ट ने नदियों के पर्यावरण-पारिस्थितिकी के संरक्षण पर गंभीरता दिखाई है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा व अधिवक्ता अलंकृता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि भीलवाड़ा के 46, टोंक के 34, अजमेर के 9 व सवाईमाधोपुर के 4 क्षेत्रों में बजरी की लीज के लिए नीलामी की जा रही थी, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल थे जहां 2022, 2023 व 2024 में भी बजरी खनन की लीज जारी की गई।
हालांकि प्रावधान यह है कि बजरी खनन क्षेत्रों को पांच भागों में बांटकर एक बार जहां की लीज जारी हो गई, वहां अगले पांच वर्ष तक लीज जारी नहीं की जाए। उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता के आरंभ में 50 हजार रुपए जमा कराने की शर्त पर इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई थी।
इन 93 लीज क्षेत्रों में 6 वे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां लीज जारी होने के बाद खनन भी शुरू हो गया था।