राजस्थान हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने आमेर क्षेत्र का दौरा कर नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण पर नाराजगी जताई। भूमि की किस्म बदलकर अतिक्रमण वैध करने की साजिश उजागर हुई। कूकस बांध, कचराला, गोमती नदी का निरीक्षण किया।
गठवाड़ी (जयपुर): राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से गठित मॉनिटरिंग कमेटी ने गुरुवार को आमेर उपखंड क्षेत्र का दौरा किया और नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमणों पर कड़ी नाराजगी जताई। कमेटी को निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर बहाव क्षेत्र में भूमि की किस्म बदल दी गई मिली, जो अतिक्रमण को वैध बनाने की साजिश की ओर इशारा करता है।
कमेटी सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र डांगी के साथ राजस्व, जेडीए, जल संसाधन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, वन विभाग और खनन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। दौरे की शुरुआत कूकस बांध से हुई, इसके बाद कमेटी ने कचराला नदी, गोमती नदी और चिताणु नाले का निरीक्षण किया। कमेटी शुक्रवार को जमवारामगढ़ और विराटनगर उपखंड क्षेत्रों के कैचमेंट एरिया का निरीक्षण करेगी।
कमेटी को कूकस बांध को भरने वाली कचराला नदी के बहाव क्षेत्र में कई नए अवरोधक दिखाई दिए। जैतपुर खिंची की पहाड़ियों से निकलने वाली गोमती नदी और चिताणु की पहाड़ियों से निकलने वाले नाले के बहाव क्षेत्र में भी अवैध निर्माण मिले। कमेटी सदस्य वीरेंद्र डांगी ने कहा कि विभागों की मिलीभगत से नदी-नालों में लगातार अतिक्रमण हो रहा है और पूर्व में दिए गए निर्देशों की अवहेलना की जा रही है।
कमेटी सदस्य डांगी ने जेडीए तहसीलदार रामकल्याण मीणा और पटवारी हेमा से भूमि संबंधित रिकॉर्ड मांगा। लेकिन दोनों के पास कोई दस्तावेज नहीं थे। अन्य विभागीय अधिकारियों ने भी जवाबदेही से बचते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल दी।
आमेर एसडीएम बजरंग लाल स्वामी, तहसीलदार सौरभ गुर्जर और अन्य कई अधिकारी निरीक्षण के दौरान एसी कारों में बैठे रहे। कमेटी को बार-बार उन्हें बुलाना पड़ा। एसडीएम स्वामी ने फील्ड में अन्य कामों का हवाला देते हुए निरीक्षण शीघ्र समाप्त करने को कहा, जिस पर कमेटी सदस्य डांगी ने नाराजगी जताई।
अचरोल में गोमती नदी के बहाव क्षेत्र में बनी 10 फीट ऊंची दीवार को तोड़ने के निर्देश पूर्व जिला कलेक्टर ने पिछले वर्ष दिए थे, लेकिन जेडीए ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। चिताणु कलां की पहाड़ियों से निकलने वाले नाले के बहाव क्षेत्र में बड़ा बांध बना मिला। निम्स यूनिवर्सिटी की ओर से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं थी।
कचराला नदी में अतिक्रमण के कारण तेज बारिश के बाद पानी की दिशा बदल गई। नदी के बहाव क्षेत्र में बने फार्म हाउसेस और रिसॉर्ट्स को बचाने के लिए पक्के निर्माण कर बहाव मोड़ दिया गया है। पिछले वर्ष कमेटी की ओर से चिह्नित किए गए अतिक्रमण आज भी वहीं मौजूद मिले।
सरकारी विभागों को बार-बार निर्देश देने के बावजूद अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। बल्कि वे ही इन्हें वैध बनाने में लगे हैं। बहाव क्षेत्र में भूमि की किस्म बदली जा रही है, रोज नए अवरोधक बनाए जा रहे हैं। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी।
-वीरेंद्र डांगी, सदस्य, हाईकोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी