
जयपुर। हाईकोर्ट ने गर्भवती व प्रसूताओं के लिए केन्द्र व राज्य सरकार की कई योजनाएं होने के बावजूद प्रसव के समय मां और शिशु की मौत पर चिंता जताई है। कोर्ट ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केन्द्र व राज्य को संयुक्त उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया।
साथ ही, इलाज के अभाव में सड़क पर प्रसव होने और जन्म लेने वाले जुडवां बच्चों की मौत के मामले में केन्द्र व राज्य सरकार से पीड़ित महिला को चार लाख रुपए मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का भी आदेश दिया।
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने फूलमती की याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रसव के समय महिलाओं और शिशुओं को मौत से बचाया जा सकेगा। कोर्ट ने गर्भवती महिलाओं की त्वरित सहायता के लिए मोबाइल ऐप बनाने और प्रसव से जुड़े मामलों में महिलाओं को प्रभावी मदद दिलाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को संवदेनशील बनाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं के लिए लॉग बुक रखी जाए, जिसमें उनसे संबंधित योजनाओं की चेक लिस्ट भी रहे। इसके अलावा नियमित समीक्षा कर यह भी देखा जाए कि महिलाओं और बच्चों को इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिल सके।