जयपुर। बेटों के बीच संपत्ति बंटवारे के विवाद में मां-बाप का 5 दशक पुराना वैवाहिक रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंच गया। पारिवारिक न्यायालय के बाद अब हाईकोर्ट ने भी 12 साल से चल रहे मामले में तलाक मंजूर करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में संपत्ति विवाद […]
जयपुर। बेटों के बीच संपत्ति बंटवारे के विवाद में मां-बाप का 5 दशक पुराना वैवाहिक रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंच गया। पारिवारिक न्यायालय के बाद अब हाईकोर्ट ने भी 12 साल से चल रहे मामले में तलाक मंजूर करने से इंकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में संपत्ति विवाद या सामान्य पारिवारिक मतभेदों के आधार पर विवाह समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश सुदेश बंसल व न्यायाधीश अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने 75 वर्षीय सेवानिवृत्त स्कूल प्रिंसिपल की ओर से तलाक के लिए दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
अपीलार्थी अगस्त 2010 में राजकीय विद्यालय से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुआ और उसने 26 मई 2014 को विवाह विच्छेद के लिए पारिवारिक न्यायालय में याचिका दायर की। इसमें बताया था कि विवाह 29 जून 1967 को हुआ और उनके दो पुत्र व एक पुत्री हैं, जिनकी शादियां हो चुकी हैं।
कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय, भरतपुर के 18 अक्टूबर 2019 के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि मामले में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत क्रूरता का कोई ठोस आधार नहीं है। पति-पत्नी ने 46 साल वैवाहिक जीवन साथ गुजारा, आम विवाद के लिए तलाक मंजूर नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि 1967 से 2013 तक पत्ति ने पत्नी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। इतने लंबे वैवाहिक जीवन में छोटे-मोटे झगडे सामान्य होते हैं और इन्हें क्रूरता नहीं माना जा सकता। संपत्ति विवाद 58 साल पुराने रिश्ते को खत्म करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
अपीलार्थी के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने कहा, वर्ष 2014 में पत्नी ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट सहित अन्य आरोप लगाते हुए एफआइआर दर्ज कराई। हालांकि पुलिस ने एफआर पेश कर दी। अपील में कहा कि संपत्ति बंटवारे को लेकर मतमेद पैदा हो गया। पत्नी संपत्ति बड़े पुत्र को देना चाहती थी, जबकि पति दोनों बेटों को समान देना चाहता था। अपीलार्थी ने पत्नी पर देखभाल नहीं करने का आरोप लगाया। वहीं पत्नी ने कहा कि एक महिला को घर बुलाने का विरोध करने पर पति ने उसे धक्का मारकर बाहर कर दिया।