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Rajasthan News : ‘दो साल हो गए, कुछ नहीं हुआ’, ‘अपनों’ के ही निशाने पर भजनलाल सरकार ! सामने आई ये बड़ी वजह

राजस्थान की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब भजनलाल सरकार को किसी और ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी के विधायकों ने घेर लिया। विपक्ष से ज्यादा भाजपा के ही सदस्य इस मुद्दे पर आक्रामक नजर आए, जिससे ये चर्चा तेज हो गई है कि क्या राजस्थान में सरकार अपनों के ही निशाने पर है?
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 14 Feb 2026, 9:57 AM IST

bhajanlal

जयपुर। राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों काफी गरमाया हुआ है। शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान एक अजीब नजारा देखने को मिला, जब भाजपा के ही विधायकों ने अपनी सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा को कटघरे में खड़ा कर दिया। मामला निजी विश्वविद्यालयों द्वारा बांटी जा रही फर्जी डिग्रियों और नियामक आयोग (Regulatory Commission) के गठन में हो रही देरी से जुड़ा था।

'दो साल हो गए, कुछ नहीं बदला': सत्तापक्ष का तीखा वार

सदन में प्रश्नकाल के दौरान जब निजी विश्वविद्यालयों की अनियमितताओं का मुद्दा उठा, तो सत्तापक्ष के कई विधायकों ने मंत्री को घेरते हुए कहा कि सरकार को आए दो साल होने को हैं, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी बदलाव नहीं दिखा है। विधायकों का आरोप था कि निजी विश्वविद्यालय नियमों को ताक पर रखकर डिग्रियां बेच रहे हैं और विभाग केवल नोटिस-नोटिस खेल रहा है।

मंत्री का बचाव: 'कोर्ट में अटका है नियामक आयोग'

उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सदस्यों के गुस्से को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। उन्होंने देरी की मुख्य वजह बताते हुए कहा:

  • नियामक आयोग: निजी विश्वविद्यालयों पर लगाम कसने के लिए नियामक आयोग का गठन होना था, लेकिन मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
  • विधिक प्रक्रिया: जैसे ही न्यायालय से हरी झंडी मिलेगी, आयोग का गठन कर दिया जाएगा। फिलहाल विभाग अपने स्तर पर जांच और कार्रवाई कर रहा है।

3. इन 10 विश्वविद्यालयों पर गिरी गाज (Blacklisted/Under Action)

मंत्री ने सदन में उन 10 विश्वविद्यालयों के नाम उजागर किए जिनके खिलाफ अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है:

  1. जेएनवीयू विश्वविद्यालय, झुंझुनूं
  2. निरामया विश्वविद्यालय, झुंझुनूं
  3. मारवाड़ विश्वविद्यालय, जोधपुर
  4. मॉडर्न विश्वविद्यालय, कोटा
  5. एमजीसी विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा
  6. सनराइज विश्वविद्यालय, अलवर
  7. श्री कृष्ण विश्वविद्यालय, चूरू
  8. जयपुर नेशनल विश्वविद्यालय, जयपुर
  9. एसएस जैन विश्वविद्यालय, जयपुर
  10. जीएसवी विश्वविद्यालय, सीकर

गिरफ्तारी और एसओजी (SOG) की एंट्री

यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। फर्जी डिग्री और गलत तरीके से मान्यता हासिल करने के मामले में एसओजी (SOG) ने भी शिकंजा कसा है।

  • प्रमुख गिरफ्तारियां: हाल ही में कुछ विश्वविद्यालय संचालकों और दलालों की गिरफ्तारी हुई है, जो बैकडेट में डिग्रियां जारी करने के गिरोह में शामिल थे।
  • लोकायुक्त की जांच: लोकायुक्त ने भी कई विश्वविद्यालयों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों पर संज्ञान लिया है, जिसके बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

क्यों निशाने पर है सरकार?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भजनलाल सरकार के लिए यह स्थिति असहज है। जब सत्तापक्ष के विधायक (जैसे कालीचरण सराफ आदि) ही सदन में मंत्री को घेरते हैं, तो इससे यह संदेश जाता है कि नौकरशाही और सरकार के बीच तालमेल की कमी है। विधायकों का मुख्य गुस्सा इस बात पर है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू हुए घोटाले अब भी जारी हैं और 'जीरो टॉलरेंस' का नारा केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।