जयपुर

Rajasthan News : मोदी सरकार ने राजस्थान के लिए फिर खोला खज़ाना- एक साथ ₹537 करोड़ मंज़ूर, जानें क्या है ये ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’?

CM Bhajan Lal Sharma के प्रयासों से Rajasthan को बड़ी सौगात। Modi Govt ने Jal Jeevan Mission 2.0 के लिए ₹537 करोड़ की केंद्रीय सहायता को दी मंजूरी, दिसंबर 2028 तक बढ़ी अवधि।
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Jul 18, 2026
Rajasthan Jal Jeevan Mission 2.0 Modi Govt Approves 537 Crore Fund Details
PM Narendra Modi and Cm Bhajanlal - File PIC

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही पेयजल की समस्या को स्थाई रूप से समाप्त करने और दूर-दराज के ढाणियों तक स्वच्छ पीने का पानी पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रभावी पैरवी और केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय के सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं, जिसके तहत भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजस्थान को 537.70 करोड़ रुपये की भारी-भरकम केंद्रीय सहायता राशि स्वीकृत कर दी है। यह विशेष वित्तीय फंड मिलने से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चल रही पाइपलाइन और वाटर प्यूरीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को एक नई गति मिलेगी और राज्य सरकार का 'हर घर जल' का संकल्प और अधिक सशक्त होकर उभरेगा।

केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई यह राशि असल में जल जीवन मिशन के प्रथम चरण की समाप्ति और दूसरे चरण के शुरू होने के बीच की अंतरिम अवधि में राजस्थान सरकार द्वारा अपने संसाधनों से किए गए अतिरिक्त खर्च की प्रतिपूर्ति के रूप में दी जा रही है।

सामान्य, SC और ST क्षेत्रों के लिए अलग-अलग बजट

केंद्र सरकार की आधिकारिक स्वीकृति के अनुसार, इस पूरे 537.70 करोड़ रुपये के बजट को सामाजिक और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है, ताकि समाज के हर वंचित तबके तक पानी की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

सामान्य क्षेत्र के लिए: ग्रामीण इलाकों के सामान्य घटकों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 307.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अनुसूचित जाति (SC) घटक: दलित बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने के लिए 177.73 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान है।

अनुसूचित जनजाति (ST) घटक: राज्य के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 52.52 करोड़ रुपये की राशि सुरक्षित की गई है।

जल जीवन मिशन - AI PIC

राजस्थान ने बनाया नया कीर्तिमान

जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक राजन विशाल ने बताया कि 1 अप्रेल 2026 के बाद से राज्य सरकार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कागजी कार्यवाही को छोड़कर अब सीधे ग्राउंड पर रिजल्ट दिखाया जाए।

प्रदेश में भौतिक रूप से पूरी तरह तैयार हो चुकी 3,241 पेयजल योजनाओं में से 2,520 योजनाओं का बहुत जल्द चरणबद्ध तरीके से 'जल अर्पण' कर जनता को समर्पित किया जाएगा।

लगभग 713 करोड़ रुपये मूल्य के ऐसे पुराने वाउचर्स की पहचान की गई है जो पहले राष्ट्रीय पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहे थे, उन्हें अब लाइव एंट्री के लिए भेजा गया है। इसके साथ ही 3,346 पुरानी योजनाओं के एकमुश्त निपटान (OTS) के लिए भी 537 करोड़ रुपये का अप्रूवल मिल चुका है।

Jal Jeevan Mission - File PIC

2,212 गांव प्रमाणित, 35 जिलों की सुधार योजना

'हर घर जल' का लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को कड़ा किया गया है। अब तक राज्य के 2,212 से अधिक गांवों को 'हर घर जल' प्रमाणित घोषित किया जा चुका है, जिसमें से 705 नए प्रमाण-पत्र तो पिछले मात्र 2 महीनों में ही जारी किए गए हैं।

इसके अलावा, प्रदेश की 93 प्रतिशत पेयजल योजनाओं के लिए डिजिटल सुजलम भारत आईडी जनरेट की जा चुकी है। शहरी क्षेत्रों को छोड़कर राज्य की सभी ग्राम पंचायतों और दूरस्थ गांवों में 100 प्रतिशत वाटर असेसमेंट का कार्य पूरा कर लिया गया है। प्रदेश के 40 में से 35 जिलों की विस्तृत जिला सुधार योजनाएं तैयार हो चुकी हैं, जबकि बचे हुए 5 जिलों का काम भी 31 जुलाई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।

डिजिटल मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता

भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री की शिकायतों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत निर्मित होने वाली सभी सरकारी संपत्तियों की 'सुजलम भारत प्लेटफॉर्म' पर अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग की जाएगी। सुजलम मोबाइल एप्लीकेशन के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल पर हर हफ्ते काम की लाइव प्रगति को अपडेट करना होगा, जिससे जयपुर में बैठे वरिष्ठ अधिकारी भी सीधे काम की गुणवत्ता देख सकेंगे।

एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए मिशन निदेशक ने बताया कि भारत सरकार ने अब इस महत्वाकांक्षी योजना की अंतिम समयसीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2028 तक कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 की आर्थिक भागीदारी से चलने वाली यह योजना आने वाले 2 वर्षों में राजस्थान के ग्रामीण अंचल की तस्वीर को पूरी तरह बदल देगी और महिलाओं को पानी के लिए मीलों पैदल चलने के अभिशाप से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगी।

Updated on:
18 Jul 2026 10:26 am
Published on:
18 Jul 2026 10:22 am