
Re NEET UG 2026 : Jaipur Toppers Pics
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नेशनल एलिजीबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट यानी री नीट-यूजी 2026 (Re NEET UG 2026) का परिणाम गुरुवार को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। 21 जून 2026 को आयोजित हुई इस देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में देशभर के 5,440 परीक्षा केंद्रों पर करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने भाग लिया था। रिजल्ट जारी होने के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस बार कुल 11.21 लाख स्टूडेंट्स देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई घोषित किए गए हैं। इस परीक्षा परिणाम में सबसे खास बात यह रही कि सफल होने वाले कुल स्टूडेंट्स में से 58 प्रतिशत संख्या गर्ल्स की है। परीक्षा के आयोजन को लेकर उपजे तमाम विवादों और मानसिक तनाव के बीच राजस्थान की राजधानी जयपुर के होनहारों ने विपरीत परिस्थितियों को हराकर सफलता का परचम लहराया है।
जयपुर के टॉप रैंक होल्डर्स ने परिणाम घोषित होने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए री-एग्जाम की तैयारी के कठिन दौर और अपने विशेष 'सक्सेस मंत्र' को देश के अन्य छात्रों के साथ साझा किया है।
ऑल इंडिया रैंक 144 (AIR 144) हासिल करने वाले जयपुर के अजय चौधरी ने बताया कि जब पहली बार नीट का मुख्य एग्जाम कैंसिल हुआ था, तो वह पूरी तरह डीमोटिवेट हो गए थे।
अजय के अनुसार, एग्जाम के रद्द होने के बाद खुद को दोबारा उसी मानसिक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ तैयार करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन इस कठिन दौर में उनके टीचर्स और पेरेंट्स ने उनका पूरा सपोर्ट किया।
अजय ने री-नीट की विशेष तैयारी के दौरान सबसे ज्यादा फोकस अपनी सिली मिस्टेक्स (छोटी-मोटी गलतियों) को सुधारने पर किया। उन्होंने नियमित रूप से मॉक टेस्ट दिए और अपनी कमियों का एनालिसिस किया।
अजय का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है, केवल निरंतर मेहनत और धैर्य ही आपको मंजिल तक पहुंचाते हैं।
जयपुर के एक और होनहार छात्र देवेश सिंह गुर्जर ने परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 153 (AIR 153) प्राप्त कर अपने पूरे परिवार का नाम रोशन किया है। देवेश के पिता एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं, जिनका खुद का सपना एक डॉक्टर बनने का था।
देवेश ने बताया कि री-एग्जाम ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद मजबूत बनना सिखाया। कई बार मन में विचार आता था कि शून्य से दोबारा शुरुआत करना बहुत मुश्किल होगा, लेकिन शिक्षकों के भरोसे ने उनकी हिम्मत टूटने नहीं दी।
अपनी तैयारी के दौरान देवेश ने रोज 8 से 10 घंटे तक नियमित सेल्फ स्टडी की। उन्होंने परीक्षा से पहले 100 से ज्यादा मॉक टेस्ट सॉल्व किए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने पूरी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर रखी, जिससे उनका फोकस बिल्कुल नहीं भटका।
ऑल इंडिया रैंक 154 (AIR 154) हासिल करने वाले जयपुर के दक्ष खंडेलवाल की सफलता की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। बायोलॉजी विषय में गहरी रुचि होने के कारण दक्ष ने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था, जिसे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से सच कर दिखाया है।
दक्ष ने बताया कि वह एक सटीक टाइम टेबल और प्लानिंग के साथ प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उनका मानना है कि किसी भी कॉम्पिटिटिव एग्जाम में अच्छी रैंक लाने के लिए लगातार टेस्ट देना और समय पर अपने सभी डाउट क्लियर करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
दक्ष ने भी अपनी तैयारी को भटकाव से बचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दूरी बनाए रखी, हालांकि कुछ चुनिंदा एजुकेशनल प्लेटफॉर्म्स की उन्होंने मदद भी ली। वह हर दिन सुबह अपने लिए एक तय लक्ष्य निर्धारित करते थे और उसे पूरा करने के बाद ही सोते थे। इसी मजबूत आत्मविश्वास की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
Updated on:
18 Jul 2026 09:46 am
Published on:
18 Jul 2026 09:45 am
