
जयपुर. सुरक्षित ड्राइविंग की पहली शर्त यातायात नियमों की जानकारी है। इसी उद्देश्य से लाइसेंस जारी करने से पहले ऑनलाइन टेस्ट लिया जाता है। अब केंद्र सरकार इस टेस्ट में पास होने के लिए न्यूनतम अंक 60 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की तैयारी कर रही है। लेकिन जयपुर सहित प्रदेश में ऑनलाइन टेस्ट की व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आ रही है। यहां आवेदकों की जगह एजेंट ही परीक्षा देकर उन्हें लर्निंग लाइसेंस दिला रहे है। आरटीओ कार्यालयों के बाहर एजेंट इस काम के लिए आवेदकों से दस्तावेज लेते हैं और सारथी पोर्टल के जरिए आवेदन कर टेस्ट पूरा करते हैं। इसके बाद लर्निंग लाइसेंस आवेदक के मोबाइल पर भेज दिया जाता है। ऐसे में आवेदक को न तो परीक्षा में पूछे गए सवालों की जानकारी होती है और न ही यातायात नियमों की समझ जांची जाती है।
इससे ऑनलाइन टेस्ट में पहचान की जांच और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में केवल पास होने के लिए जरूरी अंक बढ़ाने से क्या फायदा होगा, जब आवेदक की जगह कोई दूसरा व्यक्ति ही परीक्षा दे सकता है?
झालाना आरटीओ कार्यालय के बाहर एक आवेदक लर्निंग लाइसेंस के लिए आया। आवेदक ने लाइसेंस बनवाने के लिए कहा। एजेंट ने ऑनलाइन टेस्ट होने और पास कराने तक का दावा किया। एजेंट ने आवेदक से दस्तावेज लिए और 30 मिनट बाद आने को कहा। एजेंट ने सारथि पोर्टल से आवेदन किया और टेस्ट पासकर 30 मिनट के भीतर ही आवेदक के मोबाइल पर लर्निंग लाइसेंस भेज दिया।
पत्रिका रिपोर्टर ने एक एजेंट को कॉल कर लर्निंग लाइसेंस के लिए पूछा। एजेंट ने मोबइल पर ही लाइसेंस बनाकर भेजने के लिए कहा। एजेंट से वीडियो के बारे में पूछा तो बताया कि जो ओटीपी आएगा वही दे देना। दरअसल, एजेंट ओटीपी लेकर अपने ही मोबाइल में वीडियो चलाकर लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी कर देता है।
परिवहन निरीक्षक यशपाल शर्मा के अनुसार लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट उपयोगी है, क्योंकि इससे सड़क संकेतों, गति सीमा, ओवरटेकिंग, हेलमेट, सीट बेल्ट और दुर्घटना के समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी जांची जाती है। इससे पहले ऑफलाइन टेस्ट आरटीओ कार्यालय में लिए जाते थे। यहां आवेदक फेल भी होते थे। ऑफलाइन टेस्ट में 12 सवाल पूछे जाते थे। निरीक्षक की निगरानी में टेस्ट होता था।
ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करने का मकसद आवेदकों को आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाने से बचाना था। इसके तहत वे घर बैठे टेस्ट देकर लर्निंग लाइसेंस हासिल कर सकते हैं। लेकिन पहचान की सही जांच नहीं होने से इस सुविधा का गलत इस्तेमाल हो रहा है। आवेदन आवेदक के नाम से होता है, जबकि परीक्षा कोई दूसरा व्यक्ति देता है।
लर्निंग लाइसेंस की परीक्षा का उद्देश्य केवल आवेदक को पास या फेल करना नहीं। यह तय करना है कि उसे यातायात नियमों और सडक पर सुरक्षित वाहन चलाने की बुनियादी जानकारी है या नहीं। यदि ऑनलाइन परीक्षा में आवेदक की पहचान ही नहीं हो पा रही है और उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति टेस्ट दे रहा है, तो परीक्षा के परिणाम का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। ऐसे में केवल उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक 60 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर देना पर्याप्त नहीं होगा।
- संजीव सांखला, रोड सेफ्टी एक्सपर्ट