जयपुर

राजस्थान के सबसे लम्बे आमेर-नाहरगढ़ रोप-वे प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट की रोक, पक्षों से मांगा जवाब

Amer-Nahargarh Ropeway : राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आमेर, जयगढ़ और नाहरगढ़ किलों को जोड़ने वाले प्रस्तावित रोप-वे प्रोजेक्ट के लिए जारी अनुमति पत्र की पालना पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

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फाइल फोटो पत्रिका

Amer-Nahargarh Ropeway : राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के ऐतिहासिक आमेर, नाहरगढ़ और जयगढ़ किलों को जोड़ने वाले प्रस्तावित 'रोप-वे प्रोजेक्ट' के मामले में राज्य सरकार व अन्य से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रोजेक्ट के लिए जारी अनुमति पत्र की पालना पर रोक लगा दी, जिससे रोप वे का काम फिलहाल अटक गया है। न्यायाधीश समीर जैन ने शिवमप्राइम इंफ्राप्रोजेक्ट की याचिका पर आदेश दिया। अब सुनवाई 19 मई को होगी।

याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से अधिवक्ता अभि गोयल ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र की तर्ज पर धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर रोप-वे स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया। प्रोजेक्ट के लिए तीन कंपनियों ने आवेदन किया था, लेकिन निविदा आवंटित करते समय अनिवार्य विज्ञापन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। यह 'राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (आरटीपीपी) अधिनियम, 2012' के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

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अनुमानित लागत लगभग 80 करोड़ रुपए प्रस्तावित की थी

याचिकाकर्ता कंपनी ने इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 80 करोड़ रुपए प्रस्तावित की थी। उनका मॉडल वन क्षेत्र, वनस्पतियों और वन्यजीवों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने वाला था। इसके विपरीत, जिस कंपनी (प्रतिवादी संख्या 4) को मंजूरी दी गई, उसकी प्रस्तावित लागत करीब 350 करोड़ रुपए है। आरोप है कि इस महंगे प्रोजेक्ट से क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुंचने की आशंका है। कोर्ट ने 2 फरवरी को इस प्रोजेक्ट के लिए दी गई प्रारंभिक मंजूरी को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है।

राज्य का सबसे लंबा रोप-वे

6.5 किलोमीटर लंबाई वाला यह प्रोजेक्ट राजस्थान का सबसे लंबा रोप-वे होगा। वर्ष 2024 में घोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य तीनों किलों को आपस में जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा देना था। इसमें आमेर (मावता), माधोसिंह की ठान, जयगढ़ और नाहरगढ़ को जोड़ने की तैयारी है।

हाईकोर्ट में मैनुअल स्केवेंजिंग के मामले की सुनवाई

एक और मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रदेश में स्वच्छता कर्मियों की मौतों और मैनुअल स्केवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) की अमानवीय प्रथा के खिलाफ स्नेहांश फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को सीवर लाइनों के रखरखाव के लिए आधुनिक और सुरक्षित तकनीक पर विचार के निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर नगर निगम के आयुक्त ओम प्रकाश कसेरा, उपायुक्त (झोटवाड़ा जोन) मनीषा यादव, एक्सईएन सोनू कुमारी और संबंधित ठेकेदार शुक्रवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।

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Published on:
09 May 2026 08:14 am
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