जयपुर

राजस्थान में हर दिन 10 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन, अब ‘शुद्धता’ को लेकर आया हैरान करने वाला सच, जानें Inside Story

Rajasthan Milk Supply Reality :  राजस्थान में 1000 लाख लीटर दूध उत्पादन पर उठे सवाल। आरसीडीएफ ने हाईकोर्ट में दिया जवाब, सिर्फ 45 लाख लीटर की ही जिम्मेदारी। जानिए पूरी खबर।
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Aug 26, 2026
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Rajasthan Milk Purity RCDF affidavit News - AI PIC

राजस्थान के करोड़ों परिवारों की सुबह चाय और दूध के साथ होती है, लेकिन आपके घर पहुंच रहे दूध की शुद्धता और गुणवत्ता पर एक बहुत बड़ा गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। दरअसल, प्रदेश में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में लगातार हो रही मिलावट के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) ने एक चौंकाने वाला हलफनामा पेश किया है। RCDF ने अदालत को साफ शब्दों में बताया कि राजस्थान में हर दिन लगभग 1000 लाख लीटर (10 करोड़) दूध का उत्पादन होता है, लेकिन एक सरकारी और संगठित संस्था के तौर पर RCDF केवल 40 से 45 लाख लीटर दूध के संकलन, प्रसंस्करण और शुद्धता के लिए जिम्मेदार है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में बिक रहे करीब 96 फीसदी दूध की शुद्धता पर सीधी और पारदर्शी निगरानी का ढांचा बेहद कमजोर है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ द्वारा लिए गए स्वप्रेरित संज्ञान पर दायर इस हलफनामे के बाद अब पूरे प्रदेश में आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा तंत्र को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

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कहां जाता है 1000 लाख लीटर दूध? पूरा गणित

हाईकोर्ट में पेश अतिरिक्त अनुपालन हलफनामे के जरिए आरसीडीएफ ने राजस्थान के डेयरी सेक्टर का पूरा ढांचा कोर्ट के सामने रखा है।

कुल दैनिक उत्पादन: राजस्थान में रोजाना लगभग 1000 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है।

घरेलू उपभोग: कुल उत्पादन में से लगभग 500 लाख लीटर दूध ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर ही खुद पशुपालकों और उनके परिवारों द्वारा उपभोग कर लिया जाता है।

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मार्केटेबल सरप्लस: बाकी बचा 500 लाख लीटर दूध बाजार में बिकने (विपणन) के लिए आता है।

संगठित क्षेत्र : इस 500 लाख लीटर सरप्लस में से केवल 100 लाख लीटर दूध ही संगठित क्षेत्र के पास आता है, जिसमें RCDF (सरस) करीब 40 से 45 लाख लीटर दूध उठाता है।

असंगठित क्षेत्र : लगभग 400 लाख लीटर दूध बिना किसी कड़े नियमन या सरकारी जांच तंत्र के स्थानीय दूधियों, बिचौलियों और असंगठित विक्रेताओं के जरिए सीधे उपभोक्ताओं तक बेचा जा रहा है।

असंगठित क्षेत्र पर हमारा नियंत्रण नहीं: RCDF

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आरसीडीएफ ने अदालत में स्पष्ट किया कि वह केवल संगठित डेयरी क्षेत्र की सीमा में काम करता है और पूरे प्रदेश के दूध बाजार या निजी व असंगठित विक्रेताओं पर उसका कोई वैधानिक नियंत्रण नहीं है।

फेडरेशन ने कहा कि राज्य में मिलावट की व्यापक समस्या को देखते समय इस 400 लाख लीटर असंगठित दूध सप्लाई चेन की भूमिका और उनकी जवाबदेही पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

फेडरेशन के अनुसार, उनके अपने संग्रह केंद्रों पर दूध में यूरिया, डिटर्जेंट, केमिकल या पानी की मिलावट रोकने के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और मल्टी-लेयर टेस्टिंग लागू की गई है।

मिलावट करने वालों पर 2 लाख जुर्माना और 3 साल का बैन

Adulterated milk (File Pic)

RCDF ने अपने स्तर पर कड़े नियम लागू करने का ब्यौरा देते हुए कोर्ट को बताया कि अगर उनके किसी दूध संग्रह केंद्र पर मिलावट पाई जाती है, तो उस केंद्र को तुरंत प्रभाव से 3 वर्षों के लिए बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति या केंद्र पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के साथ-साथ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की सख्त व्यवस्था की गई है।

मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को

अगली सुनवाई 16 सितंबर को

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने RCDF द्वारा पेश किए गए इस विस्तृत जवाब को ऑन रिकॉर्ड लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने पशुपालन विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत असंगठित क्षेत्र के 400 लाख लीटर दूध की जांच और आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को क्या कड़े निर्देश जारी करती है।

Updated on:
26 Aug 2026 11:32 am
Published on:
26 Aug 2026 11:30 am