
राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए 309 नगरीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने निर्विरोध बोर्ड बनाने के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। प्रदेश की वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के कार्यकाल में बिना किसी मुकाबले के यानी निर्विरोध रूप से 33 निकायों में बोर्ड गठित हुए हैं, जो पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल की तुलना में तीन गुना अधिक हैं।
गौरतलब है कि साल 2018 से 2023 के दौरान अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में राज्य भर में केवल 11 निकायों में निर्विरोध बोर्ड बन पाए थे। भजनलाल सरकार के ढाई साल के कार्यकाल के दौरान हुए इन स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों को राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मोहर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें बीजेपी ने 30 निकायों पर पूरी तरह से एकतरफा कब्जा जमाया है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह संभाग भरतपुर और नवगठित जिले डीग में बीजेपी का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। आंकड़ों के अनुसार, भरतपुर और डीग जिले की लगभग 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भारतीय जनता पार्टी अपना बोर्ड बनाने में पूरी तरह सफल रही है।
प्रदेश में इस बार प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद 10 नगर निगमों, 47 नगर परिषदों और 252 नगरपालिकाओं सहित कुल 309 नगरीय निकायों में एक साथ मतदान कराया गया था। इसके मुकाबले पिछली कांग्रेस सरकार के समय केवल 196 नगरीय निकायों में चुनाव आयोजित हुए थे। इस बार निकायों की संख्या अधिक होने के बावजूद बीजेपी ने जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूत किया है।
राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान निर्विरोध बोर्ड बनना हमेशा से सांगठनिक मजबूती का पैमाना माना जाता रहा है:
कांग्रेस शासन (2018-2023): पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में कुल 11 निकायों में बिना किसी मुकाबले के बोर्ड बने थे। इन 11 बोर्डों में से कांग्रेस के पास 6, बीजेपी के पास 3 और निर्दलीयों के पास 2 बोर्ड आए थे।
भजनलाल सरकार (2026): मौजूदा बीजेपी सरकार में यह आंकड़ा तीन गुना बढ़कर 33 निकायों तक पहुंच गया है। इन 33 निर्विरोध बोर्डों में बीजेपी ने अकेले 30 निकायों में जीत हासिल की है, जबकि 2 निकायों में कांग्रेस और 1 निकाय में बीजेपी समर्थित बोर्ड बना है।
भरतपुर संभाग में दबदबा: मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र भरतपुर और सीमावर्ती डीग जिले की नगरपालिकाओं में विपक्ष खाता खोलने के लिए भी जूझता नजर आया, जहां 90 प्रतिशत सीटों पर बीजेपी समर्थित पार्षदों ने कब्जा जमाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव के इन नतीजों का सीधा संबंध राज्य सरकार द्वारा पिछले ढाई वर्षों में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों से है।
पूर्वी राजस्थान में जल संकट का समाधान: ईआरसीपी (ERCP) परियोजना को धरातल पर उतारने और पेयजल से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन का सीधा फायदा पूर्वी राजस्थान के जिलों जैसे भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली में बीजेपी को मिला है।
शहरी विकास परियोजनाएं: राज्य के छोटे और मध्यम शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास, सड़कों के निर्माण और स्वच्छता अभियानों के लिए जारी किए गए बजट का सकारात्मक असर मतदान के रुख में देखने को मिला।
निर्दलीय और असंतुष्टों को साधने की रणनीति: बीजेपी संगठन ने चुनाव प्रक्रिया से पहले ही असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और स्थानीय मजबूत दावेदारों को साधने के लिए विशेष रणनीति बनाई, जिसके कारण 30 से अधिक स्थानों पर विपक्षी दल उम्मीदवार तक खड़े नहीं कर सके।
प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका था जब 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाओं समेत रिकॉर्ड 309 नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ चुनाव होने के बावजूद 33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड बनना बीजेपी के पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर के नेटवर्क की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए इन नतीजों को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह अपने पुराने 11 निर्विरोध बोर्डों के आंकड़े के आसपास भी नहीं पहुंच सकी और केवल 2 निकायों में ही निर्विरोध जीत दर्ज कर पाई।
बिना किसी मुकाबले के 33 निकायों में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद अब इन सभी नगरपालिकाओं और परिषदों में नए अध्यक्षों और सभापतियों के शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
भजनलाल सरकार के मंत्रियों और स्थानीय विधायकों ने दावा किया है कि निर्विरोध बने इन बोर्डों के माध्यम से शहरों में बिना किसी राजनीतिक रुकावट के विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाएगा। इन नतीजों ने आने वाले आगामी पंचायत चुनावों के लिए भी बीजेपी कैडर में एक नया उत्साह भर दिया है।