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Rajasthan Broadband: जयपुर. राजस्थान के दूरदराज, जनजातीय और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों तक हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक हुई। इसमें डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, राइट ऑफ वे नियम-2024 के क्रियान्वयन, 4जी सेचुरेशन परियोजना और केंद्र की पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना के तहत किए जा रहे सुधारों की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि सीमांत, जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कनेक्टिविटी के अभाव में आमजन सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को लंबित कार्यों का मिशन मोड में निस्तारण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 1 जनवरी 2025 से प्रभावी नए राइट ऑफ वे नियम-2024 को सभी नगरीय निकायों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 30 सितम्बर तक अनिवार्य रूप से अंगीकृत किया जाए। उन्होंने ऑफलाइन आवेदन व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर सभी प्रक्रियाएं राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल के माध्यम से संचालित करने को कहा। बैठक में बताया गया कि सात प्रमुख विभाग पहले ही राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल से जुड़ चुके हैं।
बैठक में बताया गया कि 31 मार्च 2026 तक के सभी लंबित आरओडब्ल्यू आवेदनों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में आरओडब्ल्यू अनुमतियों के निस्तारण का औसत समय करीब 32 दिन है। मुख्य सचिव ने इसे 45 दिन से कम बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संशोधित भारतनेट परियोजना एडेंडम, कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म और समेकित बिलिंग व्यवस्था से जुड़ी शेष औपचारिकताएं समय पर पूरी करने को कहा, ताकि राज्य को विशेष सहायता योजना के तहत 150 करोड़ रुपए की पूरी प्रोत्साहन राशि मिल सके।
4जी सेचुरेशन परियोजना की समीक्षा के दौरान उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में मोबाइल टावरों के लिए लंबित राजस्व भूमि आवंटन को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत रुचि लेकर मामलों का निस्तारण करने को कहा। बाड़मेर और श्रीगंगानगर सहित सीमावर्ती जिलों के अनकवर्ड गांवों को प्राथमिकता से नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया गया।
बैठक में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने स्थानीय निकायों द्वारा अस्वीकृत आवेदनों की प्रोसेसिंग फीस लौटाने पर विचार करने, स्मार्ट मीटरिंग और समूह बिलिंग को आसान बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल टावर स्थापना पर बिना विधिक सुनवाई या आधारहीन शिकायतों के आधार पर एकतरफा रोक नहीं लगाई जाए। ऐसे मामलों का निस्तारण आरओडब्ल्यू नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिला कलेक्टर स्तर पर किया जाए। स्मार्ट सिटी डक्ट और नगरपालिका क्षेत्रों में केबल बिछाने के शुल्कों को व्यावहारिक और मानकीकृत रखने पर भी जोर दिया गया।
Updated on:
20 Sept 2026 11:05 am
Published on:
20 Sept 2026 11:05 am
