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Jaipur Nagar Nigam Election: जिस सुनीता मेठी ने BJP को दिया सबसे बड़ा झटका, वो अचानक मेयर कैंडिडेट का नामांकन लेने पहुंची 

पहली बार पार्षद बनीं सुनीता मेठी की धमाकेदार और ऐतिहासिक जीत ने कांग्रेस आलाकमान का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद पार्टी उन्हें एक बड़े राजनीतिक मंच पर मौका देने के मूड में नजर आ रही है।
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Suneeta Methi

नामांकन लेने पहुंची कांग्रेस पार्षद सुनीता मीठी

जयपुर के नगर निगम चुनाव में नतीजों के बाद भी राजनीतिक ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। 150 सीटों वाली जयपुर नगर निगम में 78 वार्डों पर जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भले ही स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने महापौर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने की आखिरी दौर की कसरत तेज कर दी। इस पूरे सियासी घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वार्ड 110 से पहली बार पार्षद चुनी गईं सुनीता मेठी (Sunita Methi) अचानक जयपुर नगर निगम मुख्यालय पहुंचीं और महापौर पद के लिए अपना नामांकन फॉर्म लिया। हालांकि आखिरी समय में ज़बरदस्त ट्विस्ट आया और कांग्रेस ने अपने वरिष्ठतम नेत्री सुनीता महावर को मेयर कैंडिडेट घोषित कर दिया। नामांकन के आखिरी मिनटों में सुनीता महावर ने कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन पत्र दाखिल किया।  

गौरतलब है कि सुनीता मेठी वही प्रत्याशी हैं जिन्होंने हाल ही में संपन्न चुनावों में जयपुर की पूर्व मेयर और भाजपा की वरिष्ठतम नेत्री ज्योति खंडेलवाल को 2 हज़ार से भी ज़्यादा वोटों के भारी अंतर से हराकर पूरे राजस्थान में सनसनी फैला दी थी। अब कांग्रेस उन्हें महापौर पद पर उतारकर भाजपा के मजबूत किले को सीधी चुनौती देने की रणनीति बना रही है।

पूर्व मेयर को हराया, इसलिए बनीं पहली पसंद

जयपुर नगर निगम के इस चुनाव में सबसे चर्चित नतीजों में से एक वार्ड नंबर 110 का रहा। भाजपा ने यहां से जयपुर की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को टिकट दिया था, जो 2009 में कांग्रेस के सिंबल पर मेयर रह चुकी थीं और पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुई थीं। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मेठी ने इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में ज्योति खंडेलवाल को बड़े अंतर से हराकर धूल चटा दी।

पहली बार पार्षद बनीं सुनीता मेठी की इस धमाकेदार और ऐतिहासिक जीत ने कांग्रेस आलाकमान का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद पार्टी उन्हें एक बड़े राजनीतिक मंच पर मौका देने के मूड में नजर आ रही है।

पार्टी का जो निर्देश होगा, वो करूंगी: सुनीता

महापौर पद के नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन सुनीता मेठी अपने भारी समर्थकों के साथ जयपुर नगर निगम मुख्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार पहुंचीं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर मेयर पद के लिए नामांकन फॉर्म प्राप्त किया। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "मैं पूरी तरह से अपनी पार्टी के आदेश पर यहां आई हूं। जिस तरह पार्टी और वार्ड की जनता ने मुझ पर भरोसा जताया है, मैं उस पर खरी उतरी हूं। आगे पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी या निर्देश देगी, मैं उसका निष्ठापूर्वक पालन करूंगी।"

कांग्रेस मेयर कैंडिडेट: सुनीता मेठी की सरप्राइज़ एंट्री 

भले ही भाजपा के पास 78 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत है, लेकिन कांग्रेस पार्टी मेयर चुनाव में आसानी से वाकओवर देने के मूड में नहीं है। कांग्रेस खेमे में महापौर प्रत्याशी को लेकर आखिरी समय तक गहन मंथन चल रहा है। निगम मुख्यालय में एक ओर जहां धर्म सिंह, भरत मेघवाल और सुनीता मावर के नाम से नामांकन पत्र खरीदे गए थे, वहीं सुनीता मेठी की अचानक एंट्री से कांग्रेस के भीतर का सियासी माहौल गरमा गया है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब इस बात पर मंथन कर रहा है कि पूर्व मेयर को हराने वाली छवि का इस्तेमाल कर किसे आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया जाए।

कौन हैं सुनीता मेठी? पहली बार पार्षद बनकर रचा इतिहास

सुनीता मेठी पहली बार जयपुर नगर निगम में पार्षद चुनी गई हैं। उनके पति अरविंद मेठी पूर्ववर्ती जयपुर हेरिटेज निगम में पार्षद रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी सामाजिक पकड़ मानी जाती है। वार्ड 110 से चुनाव लड़ते हुए सुनीता ने प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों जैसे सफाई व्यवस्था, सड़कों की जर्जर हालत और पानी की समस्या को जोर-शोर से उठाया था। जनता ने उनके जमीनी जुड़ाव को देखते हुए पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल के भारी-भरकम राजनीतिक कद के मुकाबले एक नए और स्थानीय चेहरे पर भरोसा जताया।

क्या भाजपा के बहुमत में लगेगी सेंध?

भाजपा की ओर से जहां वरिष्ठ नेता और नवनिर्वाचित पार्षद सुनील कोठारी का नाम मेयर पद के लिए तय माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस की इस सक्रियता ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। यदि दोपहर 3 बजे की मियाद तक कांग्रेस अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में बरकरार रखती है, तो आगामी 25 September 2026 को महापौर पद के लिए बाकायदा गुप्त मतदान कराया जाएगा। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस अपनी 'जायंट किलर' सुनीता मेठी के जरिए क्रॉस-वोटिंग कराने में कामयाब होती है या फिर भाजपा अपना नया बोर्ड बनाने में सफल रहती है।

सीटों का अंतिम गणित

पुनर्मतदान (री-पोलिंग) के बाद सभी 150 वार्डों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो चुकी है:

भाजपा (BJP): 78 सीटें (स्पष्ट बहुमत)

कांग्रेस (INC): 57 सीटें

निर्दलीय (Independents): 15 सीटें

शुरुआती चरण में 146 सीटों के परिणाम घोषित हुए थे, जिसके बाद तकनीकी खराबी के चलते बाकी बचे 4 वार्डों में 16 सितंबर को पुनर्मतदान करवाया गया। इन री-पोलिंग वाले चारों वार्डों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जिससे कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 पहुंच गया, हालांकि बहुमत होने के कारण भाजपा की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा