
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा- File Pic
जयपुर नगर निगम 2026 के लंबित चल रहे चार वार्डों के पुनर्मतदान के नतीजे घोषित होते ही गुलाबी नगरी की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। री-पोलिंग के बाद गुरुवार को आए नतीजों में चारों की चारों सीटें कांग्रेस के खाते में चली गईं। इस क्लीन स्विप के साथ ही कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया है, जबकि भाजपा 78 सीटों पर टिकी हुई है और 15 निर्दलीय जीतकर आए हैं। हालांकि 150 सदस्यों वाले बोर्ड में भाजपा बहुमत के 76 के आंकड़े से महज 2 सीट आगे है, लेकिन 2019 के 'विष्णु लाटा कांड' के खौफ और कांग्रेस-निर्दलीयों के 72 के संयुक्त संख्या बल ने भाजपा की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब मेयर पद के दावेदारों को लेकर भाजपा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पदाधिकारियों से लेकर दो केंद्रीय मंत्रियों की सीधी एंट्री हो चुकी है, जिससे जयपुर के मेयर का चुनाव पेचीदा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।
EVM में आई तकनीकी खराबी के बाद वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया था। गुरुवार को श्री भवानी निकेतन में हुई मतगणना में कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की।
वार्ड 9: कांग्रेस की कैलाश देवी ने 4,610 वोट हासिल कर अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा की मंजू अग्रवाल (3,846 वोट) को 764 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
वार्ड 18: कांग्रेस की वंदिता शर्मा को 4,962 वोट मिले, जिन्होंने भाजपा के नीरज कुमावत (4,781 वोट) को 181 वोटों से मात दी।
वार्ड 25: कांग्रेस की रेखा देवी सैनी 5,533 वोट पाकर विजयी रहीं, उन्होंने निर्दलीय/भाजपा समर्थित चंचल कंवर (5,136 वोट) को 397 वोटों से पीछे छोड़ा।
वार्ड 34: सबसे कड़े मुकाबले में कांग्रेस के सुरेश यादव को 4,405 वोट मिले और उन्होंने भाजपा के पीयूष किराड़ (4,256 वोट) को 149 वोटों से हराया।
78 सीटों के साथ बहुमत में होने के बावजूद भाजपा के भीतर मेयर प्रत्याशी के चयन को लेकर भारी असमंजस है। सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, शैलेंद्र भार्गव, सुभाष सिंघी, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत के नाम पहले से चर्चा में थे। अब अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल के नाम भी तेजी से आगे आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एक नए और निष्पक्ष चेहरे को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान के एक केंद्रीय मंत्री सहित दो बड़े केंद्रीय नेता और संघ के शीर्ष पदाधिकारी सक्रिय हो चुके हैं। यहां तक कि एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़े गैर-पार्षद व्यक्ति का नाम भी अचानक लॉबिंग में उछल रहा है।
मेयर पद के लिए जातीय समीकरण पूरी तरह हावी हो चुके हैं। वैश्य समाज के दावे के बाद अब अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात कर ब्राह्मण चेहरे को मौका देने की मांग की है।
दूसरी ओर, श्री अग्रवाल समाज समिति और राजपूत सभा जयपुर के प्रतिनिधियों ने भी अपनी-अपनी बिरादरी के प्रत्याशी को मेयर बनाने के लिए ज्ञापन सौंपे हैं। पार्टी के सामने एक नाम पर सर्वसम्मति बनाना सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।
भाजपा नेतृत्व को 2019 का वह उपचुनाव बार-बार याद आ रहा है, जब 90 सदस्यों वाले बोर्ड में 63 पार्षद होने के बावजूद भाजपा अपने मेयर प्रत्याशी मनोज भारद्वाज को नहीं जिता पाई थी। तब बागी भाजपा नेता विष्णु लाटा ने कांग्रेस और निर्दलीयों के साथ-साथ भाजपा के सेंधमार वोटों के दम पर 45 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। नगर निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण इस बार भी क्रास वोटिंग का खतरा बना हुआ है।
अपनी सरकार और बहुमत को सुरक्षित करने के लिए भाजपा ने निर्दलीयों में सेंधमारी तेज कर दी है। वार्ड 108 के निर्दलीय पार्षद के बाद गुरुवार को वार्ड 80 की निर्दलीय पार्षद रेणु चौधरी ने भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ले ली। भाजपा का दावा है कि 50% से अधिक निर्दलीय उनके संपर्क में हैं। हालांकि, जब तक मेयर का आधिकारिक नामांकन और वोटिंग नहीं हो जाती, तब तक रिसॉर्ट्स में कैद पार्षदों की बाड़ाबंदी और पर्दे के पीछे का खेल जारी रहेगा।
Updated on:
18 Sept 2026 08:29 am
Published on:
18 Sept 2026 08:22 am
