
राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों ने पूरे राज्य के राजनीतिक मिजाज को उजागर कर दिया है। 'एक राज्य-एक चुनाव' की तर्ज पर हुए इन बहुचर्चित स्थानीय निकाय चुनावों को 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले शहरों के राजनीतिक मूड की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा था। नतीजों में भले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन कांग्रेस और भाजपा के बीच महज 0.94 प्रतिशत वोट शेयर के अंतर ने यह साबित कर दिया है कि शहरी राजस्थान में दोनों ही दलों के बीच कांटे का मुकाबला है। जहां 10 नगर निगमों में से 4 पर भाजपा और 1 पर कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, वहीं 5 नगर निगमों में निर्दलीय प्रत्याशी सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेकर असली किंगमेकर बन गए हैं। इसके अलावा बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी (AAP) ने पहली बार ऐतिहासिक स्पष्ट बहुमत हासिल कर प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण खड़ा कर दिया है।
इस बार के निकाय चुनाव परिणामों की सबसे खास बात यह रही कि जनता ने किसी भी राजनीतिक दल को एकतरफा भारी जनादेश देने के बजाय कई जगह बेहद संतुलित और चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। कुल 309 नगरीय निकायों में से केवल 164 निकायों में ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाई है, जबकि शेष 145 निकायों में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। इन 145 निकायों में अब बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों और छोटे दलों के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। पूरे प्रदेश में भाजपा को 35.30 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस ने 34.36 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के बीच का यह मामूली 0.94 फीसदी का अंतर दर्शाता है कि शहरी वोट बैंक में कांग्रेस ने खुद को काफी मजबूत स्थिति में बनाए रखा है। वहीं दूसरी ओर निर्दलीयों ने 27.47 प्रतिशत वोट हासिल कर दोनों दलों के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
क्षेत्रीय और छोटे राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की बात करें तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने 0.95 प्रतिशत, आम आदमी पार्टी (AAP) ने 0.47 प्रतिशत, सीपीआई (एम) ने 0.32 प्रतिशत, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 0.29 प्रतिशत और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने 0.13 प्रतिशत वोट प्राप्त किए हैं। भले ही आप (AAP) का कुल वोट प्रतिशत आधा फीसदी से कम हो, लेकिन बारां नगर परिषद के सभी समीकरणों को ध्वस्त करते हुए आप प्रत्याशियों ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर नया इतिहास रच दिया है। बारां के वार्ड 34 में पूर्व कांग्रेस मंत्री व विधायक प्रमोद जैन भाया के निवासी क्षेत्र में भी कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई और आप प्रत्याशी ने शानदार जीत दर्ज की।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के प्रभाव वाले बारां नगर परिषद के 60 में से 31 वार्ड जीतकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने पहली बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
झालावाड़ नगर परिषद के 45 में से 29 वार्डों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाकर भाजपा को उनके ही मजबूत किले में करारी शिकस्त दी।
परबतसर (डीडवाना-कुचामन) के वार्ड 13 में बीजेपी उम्मीदवार और वार्ड 20 में आरएलपी (RLP) प्रत्याशी को पूरे चुनाव में केवल 1-1 वोट मिला।
परबतसर में बीजेपी उम्मीदवार कैलाश चंद्र दूसरे वार्ड के मतदाता थे, इसलिए वह खुद को भी वोट नहीं डाल सके।
जोधपुर के वार्ड 56 में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अपना खुद का बूथ और वार्ड दोनों भाजपा को नहीं जिता सके।
जोधपुर के वार्ड 88 (पूर्व सीएम अशोक गहलोत का गृह वार्ड) में भाजपा ने कांग्रेस प्रत्याशी को हरा दिया।
झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के अपने ही वार्ड 28 से मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ बीजेपी प्रत्याशी को जीत नहीं दिला पाए।
टोंक में कांग्रेस का बोर्ड बनने के बावजूद सचिन पायलट अपने निवास क्षेत्र के वार्ड 97 में कांग्रेस प्रत्याशी को हार से नहीं बचा सके।
अलवर के वार्ड 29 में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अपना खुद का बूथ और वार्ड दोनों हार गए।
जयपुर नगर निगम के वार्ड 146 (भट्टा बस्ती) से AIMIM प्रत्याशी फिरोजा बानो ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर खाता खोला।
नदबई (भरतपुर) के वार्ड 6 में निर्दलीय प्रत्याशी जगदीश प्रसाद ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को केवल 1 वोट (151 बनाम 150) से हराया।
जयपुर के वार्ड 113 से कांग्रेस के गजनफर अली ने 14,666 वोटों के विशाल अंतर से जीत हासिल कर सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड बनाया।
जयपुर के मुरलीपुरा से 21 वर्षीया बीजेपी प्रत्याशी पलक यादव ने सबसे कम उम्र में पार्षद बनने का रिकॉर्ड बनाया।
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मेठी के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
जोधपुर नगर निगम में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिलीं, जिससे महापौर का फैसला पूरी तरह निर्दलीयों के हाथ में आ गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर नगर निगम के 65 में से 36 वार्डों में निर्दलीयों ने एकतरफा कब्जा किया।
पूरे प्रदेश में बीजेपी (35.30%) और कांग्रेस (34.36%) के कुल वोट प्रतिशत में महज 0.94% का अंतर रहा।
प्रदेश की कुल 309 निकायों में से 145 निकायों में त्रिशंकु स्थिति बनी है, जहां केवल निर्दलीय ही किंगमेकर हैं।
वामपंथी दल माकपा (CPI-M) ने विभिन्न पालिकाओं में 36 वार्डों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया।
बारां के वार्ड 34 में पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया के निवास क्षेत्र में कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई और आप (AAP) प्रत्याशी विजयी हुआ।