
राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में एक बड़ी हलचल मचा दी है।
चुनाव नतीजों को देखकर एक पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि आमतौर पर स्थानीय नालियों, सड़कों, स्ट्रीट लाइट और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर लड़े जाने वाले इन चुनावों में इस बार राष्ट्रीय स्तर का 'यूजीसी रोलबैक' (UGC Rollback) मुद्दा पूरी तरह प्रभावी रहा है। दरअसल, जारी चुनाव परिणामों में जहां लगभग 1,09,523 वोट सीधे नोटा (NOTA) को मिले, वहीं 31 प्रतिशत वोट शेयर जीतकर निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों बीजेपी और कांग्रेस का गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
इस सफलता से उत्साहित राष्ट्रीय आमजन मोर्चा और श्री राजपूत करणी सेना ने साफ चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को लेकर अपना रुख साफ नहीं किया, तो आगामी पंचायती राज चुनाव 2026 में भी यह विरोध इसी तीव्रता से जारी रहेगा।
राष्ट्रीय आमजन मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक विजय कौशिक, श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना, सतीश तिवारी, वीरेंद्र सिंह राठौड़ और राम सिंह शेखावत समेत कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जयपुर में एक मंच पर आए। नेताओं ने कहा कि निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करीब 35 प्रतिशत, कांग्रेस को 34 प्रतिशत और निर्दलीयों को रिकॉर्ड 31 प्रतिशत वोट मिले हैं। इसके साथ ही 1.09 लाख से अधिक मतदाताओं का नोटा का बटन दबाना स्पष्ट रूप से पारंपरिक राजनीतिक दलों और सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता के गहरे असंतोष का प्रमाण है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो राजस्थान की 309 नगर निकायों के परिणामों में यूजीसी रोलबैक समर्थित प्रत्याशियों और नोटा अपील का असर आंकड़ों में नजर आता है। राज्य के 309 में से 145 निकायों में त्रिशंकु स्थिति बनी है, जहां अब बोर्ड बनाने की चाबी इन्हीं निर्दलीय पार्षदों के पास है। मकराना नगर परिषद में निर्दलीयों ने 60 में से 36 वार्ड जीतकर अकेले दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
जयपुर के झोटवाड़ा और विद्याधर नगर जैसे राजपूत बहुल विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ बीकानेर संभाग में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा, जिसे पारंपरिक रूप से उसका कोर वोटर माना जाता था। राजस्थान में एक लाख से ज्यादा नोटा वोट गिरना यह दर्शाता है कि आम जनता और युवा दोनों पार्टियों के विकल्पों से असंतुष्ट थे।
करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और राष्ट्रीय आमजन मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि नगर निकाय चुनावों के नतीजे केवल एक शुरुआत हैं और असली परीक्षा आने वाले पंचायती राज चुनावों में होगी। ग्रामीण अंचल में पंचायत समिति सदस्यों, जिला परिषद सदस्यों और सरपंच पदों के लिए होने वाले आगामी चुनावों में भी यूजीसी रोलबैक का मुद्दा पूरी मजबूती से उठाया जाएगा। संगठनों ने कहा है कि जब तक केंद्र सरकार इस नीति पर पुनर्विचार नहीं करती या अपना रुख स्पष्ट नहीं करती, तब तक गांव-ढाणी तक यह आंदोलन चलाया जाएगा और निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर राष्ट्रीय दलों को चुनौती दी जाएगी।
निकाय चुनाव प्रचार के दौरान सवर्ण समाज और युवा संगठनों ने 'यूजीसी रोलबैक' को लेकर एक बड़ा जन-जागरण अभियान चलाया था, जिसने कई शहरी इलाकों में मतदान के रुझान को प्रभावित किया।
करणी सेना और आमजन मोर्चा ने चुनाव से पहले शर्त रखी थी कि वे केवल उन्हीं प्रत्याशियों का समर्थन करेंगे जो यूजीसी रोलबैक के समर्थन में लिखित हलफनामा देंगे। जयपुर समेत विभिन्न जिलों में 50 से ज्यादा निर्दलीय प्रत्याशियों ने यह लिखित वादा किया था।
प्रमुख दलों के प्रति नाराजगी जाहिर करने के लिए युवाओं और सवर्ण मतदाताओं से भारी संख्या में नोटा (NOTA) का इस्तेमाल करने का आह्वान किया गया था। राजपूत और सवर्ण बहुल क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर विरोध रैलियां और यात्राएं निकाली गईं, जिसका सीधा नुकसान स्थापित पार्टियों के वोट बैंक को पहुंचा।