राजस्थान हाईकोर्ट में एसआई भर्ती रद्द करने के आदेश के खिलाफ सुनवाई जारी है। सफल अभ्यर्थियों ने कहा, एसआईटी की दूसरी रिपोर्ट में दोषियों की पहचान संभव बताई गई, इसलिए भर्ती रद्द जरूरी नहीं। अब 15 जनवरी को असफल अभ्यर्थियों का पक्ष सुना जाएगा।
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट में पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि एकलपीठ ने भर्ती परीक्षा रद्द करने का जो आदेश दिया, वह उस रिपोर्ट पर आधारित था, जो सरकार ने मांगी ही परीक्षा रद्द करने के मकसद से थी। एसआईटी ने बाद में जो रिपोर्ट दी, उसमें स्पष्ट कहा कि दोषियों की पहचान करना संभव है। ऐसे में भर्ती को रद्द करने की आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट में सोमवार को भर्ती में सफल रहे अभ्यर्थियों तथा राजस्थान लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्यों की बहस पूरी हो गई। अब 15 जनवरी को परीक्षा में असफल रहे अभ्यर्थियों की ओर से पक्ष रखा जाएगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा ने सोमवार को एसआई भर्ती रद्द करने के हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार व सफल अभ्यर्थियों की अपीलों पर सुनवाई की।
सफल अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एसआईटी की उस रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया, जो राज्य सरकार ने मांगी ही भर्ती रद्द करने के मकसद से थी। एसआईटी ने जो दूसरी रिपोर्ट दी, उसमें स्पष्ट कहा था कि दोषी और सही अभ्यर्थियों की पहचान संभव होने के कारण भर्ती रद्द न की जाए।
आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा पर केवल रामूराम राइका के बेटे-बेटी और कुछ अन्य को ही पेपर उपलब्ध कराने का आरोप है। किसी गिरोह को पेपर बेचने का आरोप नहीं है। मास चीटिंग के प्रमाण भी नहीं हैं। एसओजी ने 64 अभ्यर्थी पकड़े, उनमें से 40 ही पेपरलीक के आरोपी हैं। डमी अभ्यर्थी के आरोपी ज्यादा हैं।
सफल अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास बालिया ने भी परीक्षा रद्द करने का विरोध किया। आरपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय, तत्कालीन सदस्य मंजू शर्मा और संगीता आर्य की ओर से कहा कि उनका पक्ष सुने बिना ही उनके खिलाफ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने टिप्पणी की है, जो गलत है।