जयपुर

राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की कैविएट

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। इसमें आग्रह किया गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ यदि राज्य सरकार या अन्य कोई पक्ष अपील करता है, तो उनका पक्ष सुने बिना अदालत कोई भी एकतरफा आदेश पारित न करे।
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Updated: 27 May 2026, 7:02 PM IST
Rajasthan Panchayat Elections Medical staff angry after Jaipur District Collector order February salary bill stalled RMCTA angry
Rajasthan Panchayat Election (फोटो - AI)

Rajasthan Panchayat Nikay Election 2026 : जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। इसमें आग्रह किया गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ यदि राज्य सरकार या अन्य कोई पक्ष अपील करता है, तो उनका पक्ष सुने बिना अदालत कोई भी एकतरफा आदेश पारित न करे।

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को आगामी 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने 14 नवम्बर 2025 को पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व गिरिराज सिंह देवंदा की जनहित याचिका को निस्तारित करते समय 15 अप्रेल तक चुनाव कराने की समय सीमा तय की गई थी।

दरअसल, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने वार्डों के परिसीमन और प्रशासनिक चुनौतियों का हवाला देते हुए कोर्ट से चुनाव कराने के लिए दिसंबर तक का समय मांगा था। सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है, जिसके चलते प्रक्रियाओं में समय लगेगा। इसी वजह से माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।

सरकार की मंशा वन स्टेट-वन इलेक्शन

सरकार की ओर से कहा गया था सितंबर से दिसंबर के बीच में कई पंचायत के बीच में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा। इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा।

आयोग की माफी

इस पूरे मामले में संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांग ली थी। आयोग ने कहा था कि वह चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन राज्य सरकार ने समय पर परिसीमन संबंधी आंकड़े, आरक्षण का डेटा और जरूरी प्रशासनिक जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं। इसी वजह से आयोग समय पर चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं कर सका।

डेढ़ गुना बढ़े निकाय

इस बार राज्य के 309 निकायों में 10175 वार्डों में चुनाव होंगे। वर्ष 2019 में प्रदेश में 196 नगरीय निकाय थे, जिनमें 7475 वार्ड शामिल थे। परिसीमन और पुरगर्ठन के बाद अब 2700 नए वार्ड बनाए गए हैं। अब न्यूनतम 20 वार्ड व अधिकतम 150 वार्ड रखे गए हैं।

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