
राजस्थान में पिछले लंबे समय से अटके पड़े पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव को लेकर आखिरकार स्थितियां पूरी तरह साफ हो गई हैं। राज्य की भजनलाल सरकार और प्रदेश के लाखों जनप्रतिनिधियों व मतदाताओं के लिए राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने चुनाव कराने की समय सीमा और चरणबद्ध रोडमैप का शपथ पत्र हाईकोर्ट में पेश किया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने सरकार को 15 नवंबर 2026 से पहले हर हाल में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
सरकार द्वारा दाखिल किए गए रोडमैप के अनुसार, राज्य में पहले शहरी निकायों के चुनाव कराए जाएंगे और उसके बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस फैसले से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी राजनीति में सक्रिय दावेदारों की हलचल तेज हो गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग लंबे समय से अटके पंचायत-निकाय चुनाव की प्रक्रिया 15 अगस्त को शुरू कर देगा, 15 नवम्बर को प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। पहले निकाय चुनाव कराए जाएंगे, 20 सितंबर को पंचायत चुनाव के कार्यक्रम घोषणा कर दी जाएगी। हाईकोर्ट ने इसे मंजूरी देते हुए कहा कि अब चुनाव के लिए कोई समय नहीं दिया जाएगा और देरी हुई तो जवाबदेही तय की जाएगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने चुनाव की समयसीमा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर सोमवार को यह आदेश दिया।
05 अगस्त 2026 तक: ओबीसी (OBC) आयोग चुनावों में राजनीतिक आरक्षण से जुड़ा अपना पूरा सर्वे डेटा और फाइनल रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगा
15 अगस्त 2026 तक: वार्डों के पुनर्गठन और आरक्षण की लॉटरी निकालने की पूरी प्रक्रिया (सीटों का वर्गीकरण) को समाप्त कर लिया जाएगा
15 अगस्त के बाद: आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आम लोगों और राजनीतिक दलों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। उनके निस्तारण के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग मुख्य चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा करेगा
15 नवंबर 2026 से पहले: पंचायत और शहरी निकाय दोनों के चुनाव पूरी तरह संपन्न कराकर परिणाम जारी कर दिए जाएंगे
राज्य निर्वाचन आयोग के प्रारंभिक प्रस्ताव के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए निम्नलिखित चरणों की संभावना है
पंचायती राज चुनाव: लगभग 4 चरणों में पूरे कराए जाएंगे.
शहरी निकाय चुनाव: लगभग 2 चरणों में संपन्न किए जा सकते हैं
पेंडिंग सीटें: प्रदेश की लगभग 14,000 ग्राम पंचायतों और 300 से अधिक शहरी नगर निकायों में चुनाव होने बाकी हैं
अदालत ने पहले चुनाव कराने के लिए 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन दी थी। चूंकि ओबीसी राजनीतिक आरक्षण तय किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं था, इसलिए सरकार ने समय सीमा बढ़ाने की गुहार लगाई। आज की सुनवाई में मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह भी मौजूद रहे। कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दी गई नई टाइमलाइन में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समय पर चुनाव न होने पर सीधे अवमानना की कार्रवाई होगी।
कोर्ट ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व गिरिराज सिंह देवन्दा की जनहित याचिकाओं में 14 नवम्बर 2025 को 15 अप्रेल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था, जिसे सरकार के प्रार्थना पत्र पर 31 जुलाई तक बढ़ाया। अब सरकार ने पुन: चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया था।
इससे पहले हाईकोर्ट ने समय पर चुनाव न कराने और लगातार देरी करने को लेकर राज्य चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों को अवमानना याचिका पर कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक सीमा से अधिक समय तक चुनाव नहीं टाले जा सकते।
इसके बाद राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता ने कोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत कर निष्पक्ष, पारदर्शी और ओबीसी आरक्षण व्यवस्था को सुचारू रखते हुए चुनाव कराने की प्रतिबद्धता जताई, जिस पर अदालत ने 15 नवंबर की डेडलाइन तय करते हुए सरकार को राहत प्रदान की।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब राजस्थान के सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और मतदान केंद्रों के चिन्हीकरण का काम तेज कर दिया है। गांव की चौपालों से लेकर शहरों की गलियों तक चुनावी गणित बैठने लगा है। सरकार के लिए 15 नवंबर से पहले चुनाव संपन्न कराना अनिवार्य होगा, जिससे यह तय है कि अगस्त के दूसरे पखवाड़े से प्रदेश पूरी तरह चुनावी रंग में रंगने वाला है।