राजस्थान में छाए सियासी संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। कौन बनेगा करोड़पति की तरह की सभी के मन में एक ही सवाल है कौन होगा राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री ? मगर आलाकमान है कि ठस से मस होने का नाम नहीं ले रहा है।
जयपुर। राजस्थान में छाए सियासी संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। कौन बनेगा करोड़पति की तरह की सभी के मन में एक ही सवाल है कौन होगा राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री ? मगर आलाकमान है कि ठस से मस होने का नाम नहीं ले रहा है। पहले 48 घंटे में फैसला करने की बात कही, मगर एक पखवाड़ा गुजर जाने के बाद भी फैसला पेंडिंग है। अब सूचना आ रही है कि आलाकमान को कोई जल्दी नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की वजह से 19 अक्टूबर के बाद ही राजस्थान को लेकर फैसला संभव है।
दरअसल इस साल के अंत में गुजरात और अगले साल राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव होना है। ये सभ चुनाव कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में पार्टी दोनों ही जगहों पर चाहती है कि सरकार रिपिट हो। साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के पास गुजरात की अहम जिम्मेदारी है। इस वजह से भी पार्टी कोई भी निर्णय लेने में बैकफुट पर नजर आ रही है। पार्टी चाहती है कि इन चुनाव के परिप्रेक्ष्य में ही राजस्थान को लेकर निर्णय किया जाए। यही वजह है कि निर्णय लेने में देरी की जा रही है।
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पार्टी की अनुशासन समिति ने जिन तीन नेताओं को नोटिस दिया था, उन्होंने अपने जवाब भेजने के बाद दिल्ली की दौड़ भी लगाई है। तीनों ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी हैं। ऐसे में सीएम के नजदीकियों पर भी कार्रवाई से पहले भी पार्टी सभी बिन्दुओं पर चर्चा करेगी। ऐसे में अब सभी की निगाहें 19 अक्टूबर पर टिकीं हैं। खासकर गहलोत और पायलट गुट के नेता आलाकमान की तरफ नजरें लगाए बैठे हैं।