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Jaipur Suicide : आखिर क्या हुआ था?, एमबीबीएस छात्र नितिन ने किसी को नहीं बताया दिल का दर्द

SMS Medical College Jaipur Suicide : जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के न्यू आरडी हॉस्टल में शनिवार तड़के एक दर्दनाक घटना सामने आई। अलवर निवासी एमबीबीएस के थर्ड इयर छात्र नितिन कुमार ने खुदकुशी की। आखिर क्या हुआ... नितिन ने किसी को नहीं बताया दिल का दर्द।

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SMS Medical College Jaipur MBBS Student Suicide What happened after all Nitin told no one about pain in his heart

मृतक एमबीबीएस छात्र नितिन। फोटो पत्रिका

SMS Medical College Jaipur Suicide : सवाई मान सिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज के न्यू आरडी हॉस्टल में शनिवार तड़के एक दर्दनाक घटना सामने आई। अलवर निवासी एमबीबीएस के थर्ड इयर के छात्र नितिन कुमार (20) को आठवीं मंजिल की सीढ़ियों पर फंदे से लटका पाया गया। महिला गार्ड ने सुबह साढ़े पांच बजे उसे देखा और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस के अनुसार नितिन के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। हालांकि उसके व्हाट्सएप पर तीन संदेश जरूर मिले थे। जिसे उसने खुद को ही भेजे थे। उसमें लिखा था, मुझे माफ करना कि मैं तुम सबको छोड़कर जा रहा हूं। कृपया मेरे माता-पिता को बता देना, मैंने काफी समय से उनसे बात नहीं की, उनका सामना नहीं कर पा रहा था। लेकिन यह करना जरूरी था, हम सबके लिए बेहतर है। ये शब्द बताते हैं कि वो किसी गहरे दबाव में था, लेकिन किस बात का, ये अब भी साफ नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज में जाता हुआ दिखाई दिया नितिन

सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक नितिन शुक्रवार देर रात करीब ढाई बजे न्यू आरडी हॉस्टल पहुंचा था। इससे पहले वह अपने दोस्तों के साथ एसके मेनन हॉस्टल में पढ़ने गया था, जहां से रात करीब दो बजे अपने फ्लैट पर जाने की बात कहकर निकला था। सीसीटीवी में वह पौने तीन बजे तक सातवीं मंजिल पर दिखा और सवा तीन बजे के बाद कैमरे में नहीं आया। जिस आठवीं मंजिल पर उसने फंदा लगाया, वहां कोई सीसीटीवी नहीं था।

हॉस्टल स्टाफ का कहना है कि वह लैपटॉप बैग में रस्सी लेकर आया था। पुलिस को उसके पास से एक स्मार्टफोन और लैपटॉप मिला है।

कमांडो पिता को ट्रेन में मिली सूचना

नितिन के पिता अर्जुन सिंह बीएसएफ में कमांडो हैं और पश्चिम बंगाल में तैनात हैं। वे छुट्टियों पर घर आ रहे थे और ट्रेन में ही थे जब उन्हें बेटे की मौत की खबर मिली। अर्जुन सिंह का कहना है कि नितिन बहादुर और होनहार बच्चा था, उन्हें यकीन नहीं होता कि उनका बेटा ऐसा कदम उठा सकता है। बात करते-करते उनकी आवाज भर आई।

उन्होंने कहा कि "अगर उसने मुझसे अपनी समस्या साझा की होती, तो उसका हल जरूर निकालते। लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया। न दोस्तों को, न घर में किसी को।" नितिन दो भाइयों में छोटा था और पिछले तीन साल से जयपुर में रहकर पढ़ाई कर रहा था।

अपनी शर्तों पर जीता था जिंदगी

अंतिम विदाई देने के लिए नितिन के कई दोस्त और सहपाठी मोर्चरी के बाहर मौजूद थे। आंखें नम थी, पर हर कोई उसे उसी अंदाज में याद कर रहा था जैसा वो था बेफिक्र, जिंदादिल। दोस्तों ने बताया कि नितिन जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीता था। कल परीक्षा हो और आज कोई फिल्म देखनी हो, तो वो पूरी रात फिल्म देखता था, बिना किसी चिंता के।

हम सब चाहते थे कि काश हम भी उस जैसे बेफिक्र हो पाते,"एक दोस्त ने कहा। सत्ताईस अप्रैल को सभी दोस्त एक शादी में साथ गए थे। खूब मस्ती हुई, नितिन भी बेहद खुश था। "हममें से किसी को समझ नहीं आ रहा कि ये कैसे हो गया।