
राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के बीच चल रही तनातनी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। कृषि एवं ग्रामीण विकास मामलों में सक्रिय रुख अपनाने वाले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में छापेमार कार्रवाइयों को लेकर मीडिया से बातचीत करते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने सीधा हमला बोला है। डोटासरा ने दावा किया कि शासन के उच्च स्तर से यह स्पष्ट संदेश जारी कर दिया गया है कि अब आगे से किसी भी अधिकारी को किरोड़ी लाल मीणा के साथ इस तरह की छापेमारी में जाने की अनुमति नहीं होगी।
पत्रकारों द्वारा श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ क्षेत्र में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के औचक निरीक्षण और छापों पर पूछे सवाल पर गोविंद सिंह डोटासरा ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह सब अब बंद होने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि अब मंत्री के साथ कोई भी सरकारी अधिकारी ऐसी कार्रवाइयों में हिस्सा नहीं लेगा।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री और दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा, "वो तो सीएम साहब से पूछिए कि उन्होंने काम करने के लिए क्या गुरु मंत्र दिया है? दिल्ली का समाचार तो यही है कि अब अधिकारियों को साथ लेकर ऐसे छापे मारना संभव नहीं होगा।"
पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने केवल अधिकारियों के न जाने का दावा ही नहीं किया, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक समझौता होने का भी आरोप लगाया। डोटासरा का कहना था कि पर्दे के पीछे एक सहमति बनी है, जिसके तहत किसी को बचाने की एवज में छापेमार कार्रवाइयों को रोकने का फैसला किया गया है।
डोटासरा के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर यह संदेश साफ तौर पर पहुंचा दिया गया है कि कोई भी सिविल या पुलिस अधिकारी किसी मंत्री की व्यक्तिगत या गैर-आधिकारिक छापेमारी का हिस्सा नहीं बनेगा।
राजस्थान में भजनलाल सरकार के गठन के बाद से ही डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपनी कार्यशैली के लिए लगातार चर्चा में बने हुए हैं। विभिन्न विभागों में अनियमितताओं को पकड़ने के लिए वे खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस और विशेष रूप से गोविंद सिंह डोटासरा लगातार इन छापों की वैधानिकता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते रहे हैं।
गोविंद सिंह डोटासरा का ये ताज़ा बयान राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है, जहाँ एक तरफ सरकार सुशासन और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहा है।