
जयपुर। रोडवेज और जेसीटीसीएल बसों की हड़ताल से दिव्यांग बच्चों को खासी परेशानी हो रही है। परिवहन विभाग की बस बंद होने के कारण प्रदेश भर के दिव्यांगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जयपुर के जेएलएल मार्ग स्थिति राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर विद्यालय के दिव्यांग बच्चों के साथ भी निजी बस संचालक दुर्व्यहार कर रहे है। ऐसी ही एक तस्वीर जयपुर के मूक बधिर विद्यालय से सामने आई है जहां पर निजी बस संचालक इन दिव्यांग बच्चों के साथ दुव्र्यवहार कर रहे है। निजी बस चालक इन्हें बस में ही नहीं बैठाते है और अगर कोई गलती से बैठ रहा है तो निजी बसों के कंडक्टर इनसे मारपीट कर रहे है। जिसके बाद मारपीट कर इन्हें वापस बस से धक्का देकर उतारा जा रहा है।
रोडवेज और जेसीटीसीएल बसों की हड़ताल की वजह से दिव्यांग बच्चों को स्कूल आने जाने में खासे परेशानी हो रही हैं। इन बच्चों को निजी बस संचालक बसों में चढऩे ही नहीं देते हैं। जिसकी वजह विद्यार्थी होने के कारण से इन दिव्यांग बच्चों से आधा किराया ही लिया जा सकता है। आधा किराया मिलने के कारण निजी बसों के कंडेक्टर बच्चों को बस में बैठाना तो छोड़ उनसे दुर्रव्यवहार कर रहे है। वह भी ऐसे में जब लालकोठी, मोतीडूंगरी, गांधीनगर थाने के साथ साथ परिवहन विभाग का कार्यालय भी इन बच्चों के स्कूल के पास ही है लेकिन इन बच्चों की पीड़ा कोई नहीं समझ रहा है।
मूक बधिर स्कूल में लगभग 900 बच्चे हैं, जिनमें से करीब 350 बच्चे हर रोज बिना किसी सरकारी सहायता के शहर के अलग-अलग स्थानों से स्कूल की तरफ निकलते है। पर प्रदेश में रोडवेज की हड़ताल कुछ ऐसी हुई कि निजी बस वालों की कमाई ही नहीं बढ़ी बल्कि इन दिनों उनके हौसले भी सातवें आसमान पर है।
ना बोल सकते है ना सुन सकते
यह वह बच्चें है जिनसे रब पहले से ही रूठा हुआ था। ये ना तो बोल सकते हैं और ना सुन सकते हैं इसके बाद भी पढ़ाई करके अपने जीवन को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन निजी बस संचालकों का अमानवीय चेहरा इन बच्चों के हौंसलों को तोड़ रहा है।
इनका यह कहना...
प्रान्तीय विशेष शिक्षा सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल मीणा ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के साथ दुव्र्यवहार हो रहा है। मारपीट की जा रही है लेकिन पुलिस कोई एक्शन नहीं ले रही है। निजी बसों के कंडक्टर बच्चों से बदतमीजी कर रहे है। स्टूडेंट और हम सरकार से गुहार लगाते है कि इन बच्चों के साथ हो रही मारपीट की घटना को रोका जाए और सरकार उनको स्कूल तक पहुंचाने में राहत दें।